बगैर इलाज कराये ही गोल्डन कार्ड से रुपये की निकासी, जांच में पहुंचे सीएस, प्रखंड के छोटी आमर गांव का मामला

नालंदा (बिहार) – हरनौत प्रखंड की कोलावां पंचायत के छोटी आमर गांव निवासी रहे स्व कामेश्वर प्रसाद के ऑपरेशन के नाम पर बिहारशरीफ के अनन्या नर्सिंग होम के द्वारा उनके गोल्डन कार्ड के माध्यम से पूरे तीन बार सहायता राशि की निकासी का मामला सामने आया है। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ राम प्रसाद सिंह स्वयं जांच में लाभुक के घर पहुंचे। उन्हें यह जानकर हैरत हुई कि कामेश्वर प्रसाद या उनके का कोई सदस्य कभी उस नर्सिंग होम में गया ही नहीं। कामेश्वर प्रसाद की मौत पिछले वर्ष अप्रैल महीने में हो गई थी।
मृतक के आश्रितों ने बताया कि स्व कामेश्वर प्रसाद राजगीर में होमगार्ड के पद पर कार्यरत थे। उनकी तबियत खराब होने पर राजगीर के रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां से उन्हें पावापुरी विम्स और फिर पीएमसीएच रेफर किया गया। पटना में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस दौरान वे कभी-भी अनन्या नर्सिंग होम नहीं गये थे। इसके बाद भी उनके जीवित रहने के दौरान आयुष्मान भारत के अंतर्गत बने परिवार के गोल्डन कार्ड से नर्सिंग होम प्रबंधन के द्वारा उनके ऑपरेशन के नाम पर तीन बार राशि की अवैध निकासी की गई है। प्रभारी डॉ राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि संभवत: संबंधित नर्सिंग होम पहले से जांच के दायरे में था। उसी की जांच के दौरान कामेश्वर प्रसाद के तीन बार ऑपरेशन होने के संबंध में भौतिक सत्यापन के लिए सीएस छोटी आमर पहुंचे थे।

संदेह के घेरे में आ सकते हैं कई डॉक्टर

जानकार बताते हैं कि बड़े सरकारी अस्पतालों में स्पेशलिस्ट सर्जन वगैरह होते हैं। इनसे निजी अस्पतालों व नर्सिंग होम के प्रबंधकों के द्वारा ऑपरेशन आदि के लिए कांट्रेक्ट किया जाता है। इसके लिए उन्हें मोटी रकम दी जाती है।
बदले में आर्थिक रुप से कमजोर अथवा उनकी नासमझी का फायदा उठाकर अक्सर निजी स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से वैसे डॉक्टर उनका शोषण करवाते हैं।

रिपोर्ट – गौरी शंकर प्रसाद

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