जिन्होंने स्वयं शिक्षा का सम्मान नहीं किया वे शिक्षकों का क्या सम्मान करेंगें : पुष्पम प्रिया चौधरी

पटना, 25 अगस्त 2020 (प्रेस प्लुरल्स) प्लुरल्स पार्टी की प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी ने बिहार सरकार द्वारा नियोजित शिक्षकों के प्रति की जाने वाले दोहरेपन की नीति की कड़ी आलोचना की है. प्रारंभ से इन शिक्षकों को प्रताड़ित करने वाली सरकारें अब वायदों का लॉलीपॉप देकर लुभाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने इस नीति को घोर अवसरवादी औऱ चुनावी हथकंडा कहा.
उन्होंने कहा कि “सरकारों ने शिक्षकों को सम्मान देना तो दूर उपेक्षित करने की नई परंपरा शुरू की है”. एक जमाने मे शिक्षकों का सम्मान किया जाता था. एक दौर वह भी था जब शिक्षकों की पूजा की जाती थी, शिक्षकों ने वह दौर भी देखा जब उन्हें भगवान के ऊपर चुना जाता था. यह बहुत पहले की बात नहीं, महज कुछ साल पहले शिक्षक राष्ट्राध्यक्ष हुआ करते हैं. परंतु आज “आपने” शिक्षकों का क्या हाल कर दिया है. क्यों शिक्षक बदहाल स्थिति में हमारे भविष्य निर्माण के लिए मजबूर हैं. पुष्पम प्रिया चौधरी ने सवाल उठाते हुए कहा कि “शिक्षकों के लिए सम्मान कंहा गायब हो गया है? सम्मान छोड़िए, भगवान से तुलना छोड़िए उचित सम्मानजनक वेतन कंहा है?”

प्लुरल्स पार्टी की प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी कहती हैं कि “शिक्षक मतलब शिक्षक होता है. सभी शिक्षक एक हैं, सभी राज्य सरकार के कर्मचारी हैं और इसलिए सभी के पदनाम, सेवा-शर्त, वेतन-संरचना, प्रोन्नति नियम आदि एक ही होने चाहिए. पॉलिसी की समझ नहीं रखने वाले नक़ली नेताओं ने शिक्षा में भी जाति-व्यवस्था और विभेदकारी व्यवस्था स्थापित कर दी है. यह स्थायी, अस्थायी, नियोजित, टीईटी, अतिथि इत्यादि कि ‘फूट डालो राज करो’ की पुरानी नीति कायम रखने का प्रयास किया ताकि सत्ता में बने रहें”.

प्लुरल्स पार्टी की मुख्यमंत्री उम्मीदवार पुष्पम प्रिया चौधरी ने कहा कि “हर चुनाव से पहले किसी को बकाया वेतन दे देना, किसी की सेवा-शर्त में बदलाव दिखा देना, किसी का नया नामकरण कर देना और जो अभ्यर्थी हैं उन्हें ‘लाखों’ नई नियुक्ति की मरीचिका दिखा देना, यही बिहार के सरकारों की शिक्षा और शिक्षकों के प्रति नीति रही है. जो खुद शिक्षित नहीं हैं और जिन्होंने खुद ही कक्षाओं में शिक्षकों का सम्मान नहीं किया, वे क्या शिक्षा नीति बनाएँगे और शिक्षकों का सम्मान करेंगे!”
पुष्पम प्रिया चौधरी ने कहा कि बिहार की शिक्षा-व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव किया जाएगा और उस बदलाव की पहली शुरुआत शिक्षकों के सम्मान से ही होगी, उनकी सेवाओं की विभेदकारी व्यवस्था के एकीकरण से ही होगी.
नियोजित शिक्षकों के प्रतिनिधि मंडल से बातचीत में इन्होंने कहा कि “सबसे अधिक जरूरी है कि शिक्षकों के सम्मान औऱ शिक्षा की प्रतिष्ठा को बहाल किया जाए. बिहार का विकास तभी होगा जब शिक्षा व्यवस्था को रूपांतरित किया जाएगा औऱ इसके सूत्रधार शिक्षक होंगे. मैंने न केवल बिहार को बदलने की कसम खाई है बल्कि अपने शिक्षकों की गरिमा को बहाल करने के लिए उन्हें सम्मानजनक जीवन और सम्मानजनक वेतन देने की कसम खाई है”.
शिक्षकों से वायदा करते हुए लिखा कि “प्रिय मैडम सर और मैं आपसे वादा करती हूं कि आपके जीवन की गुणवत्ता किसी भी विकसित देश के शिक्षक के बराबर रहेगी, क्योंकि आप बिहार के भविष्य को शिक्षित करने के लिए सम्मान के पात्र हैं •

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