गड्ढे में फंसी ट्रक, रात में घंटों वन-वे रहा एनएच 20

नालंदा | गौरी शंकर प्रसाद | एनएच 20 को फोरलेन बनाने की प्रक्रिया वर्षों से लंबित है। कभी इस ओर तो कभी उस ओर से फोरलेन बनने की चर्चा धरातल पर आने की बाट ही जोह रही है। इस चक्कर में पुरानी सड़क रखरखाव से भी वंचित है। यही वजह है कि ट्रेन की बोगियां(रेल कोच के नीचे का हिस्सा) लादे ट्रक हरनौत बाजार के मध्य गड्ढे में फंसकर बंद हो गई। इस दौरान करीब चार घंटे तक सड़क पर वाहनों का आवागमन वन-वे रहा। इस दौरान बिहारशरीफ व बख्तियारपुर की ओर से आने वाले खासकर बड़े वाहनों की लंबी कतार लग गई।


गोपाल पांडेय, रमेश सिंह, अशोक जायसवाल, विकास गुप्ता, कुंदन सिन्हा, चंदन शर्मा कहते हैं कि हरनौत, वेना से भागनबीघा बाजार तक एनएच की स्थिति ग्रामीण सड़क से भी खराब है। मरम्मत के अभाव में सड़क की सतह नीची हो गई है। इस वजह से बारिश का पानी सड़क पर ही जम जाता है। उसपर बड़े वाहनों के चलने से अब इसकी हालत और जीर्ण-शीर्ण हो गई है। आलम यह है कि लोग घरों में निर्माण कार्य आदि से निकले ईंट-बालू-सीमेंट से गड्ढों को भरकर कामचलाऊ बनाते रहते हैं।
यह स्थिति तब है, जबकि इस सड़क को बिहार-झारखंड की लाइफ लाइन कहा जाता है। यह एनएच से कम और रांची रोड से ज्यादा जाना जाता है।

छोटे वाहनों की शामत

सड़क में बने गड्ढों से इस पर चलने वाले छोटे वाहनों की शामत ही आ गई है। सड़क की स्थिति से अंजान तिपहिया और दोपहिया वाहन सवार अक्सर दुर्घटना के शिकार होते हैं।
जबकि, पुलिस-प्रशासन के माध्यम से शिकायत के बाद भी एनएच वालों के कान में जूं तक नहीं रेंगती है।

दिनभर रहती है जाम की स्थिति

बिहार जहां कृषि प्रधान राज्य है, वहीं झारखंड उद्योग प्रधान राज्य है। इस सड़क के माध्यम से ही राज्यों की अधिकांश आर्थिक गतिविधियां संचालित होती है। पर हरनौत बाजार में सड़क की स्थिति और उस पर पसरे बाजार के कारण वाहनों की गति मिनटों से कभी-कभी घंटों तक थम जाती है। इसका नतीजा आम लोगों के साथ व्यवसायियों को भी भुगतना पड़ता है।

आइए जानते हैं क्या कहते हैं अधिकारी

सीओ अखिलेश चौधरी ने बताया कि इस संबंध में कई बार एनएचएआई को सूचना दी गई है। पर, कार्रवाई शुन्य है। बारिश में सड़क के गड्ढों से कभी-भी कोई बड़ी घटना हो सकती है। अब इस संबंध में अनुमंडलाधिकारी को कार्रवाई के लिए लिखा गया है।

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