आज सबसें बड़ा सूर्यग्रहण , नक्षत्रो का ऐसा संयोग 500 सालों में कभी नहीं बना

आज साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। ये वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। ग्रहण की शुरुआत आज सुबह 10:20 बजे के करीब हो जाएगी और इसकी समाप्ति दोपहर 01:49 बजे तक होगी। ये ग्रहण भारत में दिखाई देने वाला है इसलिए इसका सूतक भी मान्य होगा। सूतक काल की शुरुआत 20 जून की रात 10.17 बजे से हो चुकी हैं । ज्योतिष अनुसार ये ग्रहण काफी प्रभावशाली माना जा रहा है। क्योंकि इस सूर्य ग्रहण के समय ग्रह और नक्षत्रों का ऐसा संयोग बनने जा रहा है जो पिछले 500 सालों में नहीं बना।

ग्रहण के दौरान ग्रहों की स्थिति:

ये ग्रहण मृगशिरा, आर्द्रा नक्षत्र और मिथुन राशि में लगने जा रहा है। ग्रहण के दौरान 6 ग्रह बृहस्पति, शनि, मंगल, शुक्र, राहु और केतु वक्री अवस्था में होंगे। राहु और केतु तो सदैव ही वक्री रहते हैं। ग्रहों की ऐसी स्थिति सूर्य ग्रहण को बहुत ही अधिक प्रभावशाली बनाएगी। ज्योतिष अनुसार ग्रहण प्राकृतिक आपदाओं का कारक बन सकता है। जिसकी वजह से भूकंप, आंधी या तूफान जैसे योग बन रहे हैं।

क्या होता है वलाकार सूर्य ग्रहण: ऐसा नजारा धरती पर कम ही देखने को मिलता है। इस दिन सूर्य एक चमकती अंगूठी की तरह दिखेगा। ये न तो आंशिक ग्रहण होगा और न ही पूर्ण। चंद्रमा की छाया सूर्य का 99% भाग ढकेगी। जिस कारण सूर्य के किनारे वाले हिस्सा प्रकाशित रहेगा और बीच का हिस्सा पूरी तरह से चांद की छाया से ढक जाएगा।

कहां दिखाई देगा ग्रहण:

भारत समेत नेपाल, पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूऐई, एथोपिया तथा कोंगों में दिखाई देगा। भारत में देहरादून, सिरसा और टिहरी कुछ ऐसे प्रसिद्ध शहर हैं जहां वलयाकार सूर्य ग्रहण दिखेगा और देश के बाकी हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण का नजारा देखने को मिलेगा।

सूर्य ग्रहण पर क्या रखें सावधानियां:

सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए। इस दौरान सूर्य से निकलने वाली किरणें आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए इसे देखने के लिए खास तरह के उपकरणों का प्रयोग करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं अनुसार ग्रहण के समय किसी भी तरह के शुभ काम नहीं करने चाहिए। ग्रहण के समय न तो कुछ खाना चाहिए और न ही कुछ पीना। ग्रहण से पहले खाने पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालकर रख देने चाहिए। ग्रहण काल में प्रभु का स्मरण करते हुए पूजा, जप, दान आदि धार्मिक कार्य करें। ग्रहण का सूतक काल लगते ही घर में बने पूजास्थल को भी ग्रहण के दौरान ढक दें। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर लें और पूजा स्थल को भी साफ कर गंगाजल का छिड़काव करें।

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