बारिश ने बढ़ाई बाजार वासियों की मुश्किलें, बाहर से आने वालों की फजीहत

रिपोर्ट – गौरी शंकर प्रसाद
  • शादी-ब्याह की रस्मों के लिए घर से निकलना मुश्किल
  • सड़क पर फैला नाले का पानी

नालंदा (बिहार) – हरनौत प्रखंड मुख्यालय स्थित हरनौत बाजार में बारिश के बाद जलजमाव से स्थिति नारकीय हो गई है। इससे बाजार वासियों की मुश्किलें बढ़ी हैं तो बाहर से आने वालों की भरे बाजार में फजीहत का सामना करना पड़ता है। शादी-ब्याह का लग्न जोर पर है। पर, जलजमाव से रस्मों के लिए घर से निकलना भी मुश्किल हो रहा है। यह स्थिति कोई नई नहीं है। बल्कि, हर वर्ष बारिश से यह दशा आम है। बावजूद इसका कोई स्थायी निदान आज तक नहीं किया गया है। जबकि, प्रभावित व्यवसायी वर्ग, बाजारवासी अफसरों के आगे गुहार लगाते थक चुके हैं।
प्रखंड मुख्यालय के बीच बाजार, स्टेशन रोड, चंडी रोड, पटेल नगर, पंचशील नगर, आदर्श नगर, सदभावना नगर, अंबेडकरनगर सहित बाजार के सभी मोहल्लों की स्थिति यही है। यही वजह है कि अब निकास के अभाव में जलजमाव का संकट प्रखंड कार्यालय तक पहुँच गया है। वहां भी परिसर में बारिश का पानी जम जाता है। लोगों को वैकल्पिक रास्ता चुनना पड़ता है।


कोरोना संकट के दौरान शादी-ब्याह के तारीख टाल दिये गये थे। वर्तमान में जबरदस्त लग्न है। मटकोर, दहपूजी जैसी रस्मों के लिए देवी स्थान आदि जगहों पर जाने की परंपरा है। पर, जलजमाव का आलम यह है कि घरों से निकलने में भी परेशानी है। बाहर से रिश्तेदारी, मार्केटिंग आदि के लिए बाजार आने वालों की तो फजीहत हो जाती है। स्टेशन रोड में नियामतपुर व राम-जानकी मंदिर और मेन रोड में बीच बाज़ार, कृष्णापुरी व बैंक मोड़ के पास अक्सर अंजान बाइक अथवा साइकिल सवार गिरते हैं। तिपहिया सवारी वाहनों के पलटने का खतरा बना रहता है।

कागज पर संसाधन भरपूर, असली सूरत से कोसों दूर

हरनौत बाजार से जुड़े कागजी नक्शे पर संसाधन भरपूर हैं। मुहाने नदी से जुड़े एक, दो नहीं, बल्कि अनेक पईन हैं।
बाजार व आसपास पईन-पोखर-तालाब की स्थिति यह दिखाती है कि आवश्यकता नुसार पानी जमा कर सकते हैं। इसके लिए चंदन तालाब, बीच बाजार से लगे जनता मार्केट के पीछे का जलस्त्रोत, बड़की पुल व अन्य संसाधन थे।
पानी अधिक हुआ तो पईन के सहारे चेरन, फलहनवा तक पहुंचता और खेतों के पटवन के काम आता था। अन्यथा पंचाने में मिलकर गंगा नदी तक जुड़ाव था। इस वजह से इस मौसम में यहां झुंड के झुंड प्रवासी पक्षी आते थे।
पर, आज सब नदारद है। मामूली बारिश होने पर पानी घरों में घूसने लगता है। जलनिकास के रास्तों का अतिक्रमण करके रसूखदार उसपर किराया लगाकर मोटी रकम वसूल रहे हैं। कुछ ने देखा-देखी गैरमजरुआ पर पैर पसार रखे हैं। इस वजह से कार्रवाई के अभाव में अतिक्रमण की स्थिति और जटिल होती जा रही है।

क्या कहते हैं अधिकारी

सीओ अखिलेश चौधरी ने बताया कि नगर पंचायत बनने पर बाजार क्षेत्र की समस्या का कार्यपालक अधिकारी प्राथमिकता से निराकरण करवाते। पर, उस पर रोक लगवा दी गई। इस स्थिति में संबंधित पंचायत प्रतिनिधि योजना देकर नाली-गली का निर्माण करवा सकते हैं। वार्ड स्तर पर भी इसके लिए राशि उपलब्ध कराई गई है।
मुखिया, पंचायत समिति सदस्य व वार्ड सदस्य इसके लिए पहल करें।

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