एक दैनिक अखबार एवं अपवा पत्रकार संगठन के जिला अध्यक्ष के ऊपर अपराधियों ने किया जानलेवा हमला, पत्रकारों पर जानलेवा हमला दुर्भाग्यपूर्ण मानपुर के अपराधियों ने पत्रकार पर किया जानलेवा हमलाबाल – बाल बचे पत्रकार,राजनीतिक बुद्धिजीवी एवं समाजसेवी संगठनों ने की घोर निंदा*

गया । गया जिले के पत्रकार संगठन अपवा के जिलाध्यक्ष एवं एक दैनिक अखबार से जुड़े पत्रकार विवेक कुमार पांडे पर अपराधियों ने जानलेवा हमला किया है जिससे वे बाल-बाल बच गए हैं आगे बताया जाता है कि अपराधी मानपुर के रहने वाला है जिन्होंने जानलेवा हमला पत्रकार पर किया है पत्रकार की घटना घटने के उपरांत पत्रकारों में आक्रोश व्याप्त है l घटना को राजनीतिक बुद्धिजीवी एवं समाजसेवी संगठनों ने घटना को निंदा करते हुए दुर्भाग्यपूर्ण बताया है l और जिला प्रशासन पुलिस प्रशासन से अभिलंब अपराधियों को गिरफ्तार करने की मांग की है अपवा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष विनोद पांडे ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कड़ी निंदा की है और वरीय पुलिस अधीक्षक गया से अभिलंब अपराधियों को जांच करते हुए कार्रवाई करने की मांग किया है ऐसे तो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर अपराधियों द्वारा हमला की घटना पहली घटना नहीं इसके बावजूद भी न सरकार पत्रकारों के प्रति शुभचिंतक दिखी और ना ही प्रशासन,जबकि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ के रूप में जाना जाता है इसके बावजूद भी पत्रकारों पर जानलेवा हमला किया जाना कहीं से भी उचित नहीं है यदि पत्रकारों पर हमला करने वाले असामाजिक तत्वों पर पुलिस प्रशासन करवाई की होती तो अपराधी संगठन का मनोबल सर चढ़कर नहीं बोलता,दिनों दिन के उजाले एवं किसी भी समय अपराधियों द्वारा घटना का अंजाम देकर नौ दो ग्यारह हो जाना पुलिस प्रशासन के कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा होना लाजमी है आखिर पत्रकारों पर जानलेवा हमला कब तक होते रहेगा,और पुलिस प्रशासन मूकदर्शक कब तक बनते रहेगी,ऐसे कई सवाल हैं जो पत्रकारों के जेहन में कौध रहा है l पीड़ित पत्रकार विवेक कुमार पांडे ने आपबीती दुखड़ा सुनाते हुए संवाददाता को बताया कि मानपुर के अपराधी तत्व के लोगों ने मेरे घर पर आकर जानलेवा हमला किया है l जिसमें मैं बुरी तरह से जख्मी हुआ हूं l मैं बाल-बाल बच गया है ,अपराधी जानलेवा हमला करते रहे मैं इस घटना से काफी आहत हूं जब पत्रकारों के साथ अपराधी अपराध कर नौ दो ग्यारह हो जा रहे हैं पुलिस प्रशासन को फोन करने पर जवाब नहीं मिल पा रहा है तो और जनता की सुरक्षा कैसे होगी,जहा एक तरफ सरकार पत्रकारों की सुरक्षा देने की बात करती है वही लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला अपराधियों द्वारा लगातार हो रहे हैं अपराधी अपराध कर नौ दो ग्यारह हो रहे हैं और पुलिस प्रशासन गहरी नींद में सोई है क्या इससे पुलिस प्रशासन आम जनता की विश्वास जीत पाएगापाएगा, ऐसे कई सवाल हैं जो पत्रकारों एवं जनमानस के बीच कोध रहा है l पत्रकार संगठनों ने कहा है कि यदि पुलिस प्रशासन अपराधियों पर नकेल कसते हुए करवाई नहीं करती है तो बाध्य होकर पत्रकार संगठन चट्टानी एकता का परिचय देते हुए आंदोलन करने को विवश हो जाएगा l

रिपोर्ट – धीरज गुप्ता

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