सुगौली संधि बनाम भारत नेपाल के रिश्ते ने चल रहा है अनबन

Sugauli Treaty vs India Nepal relationship is going on

रिपोर्ट: रविशंकर मिश्रा

मोतिहारी ! 19 वीo सदी के शुरुआती दौर में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के मध्य एक समझौता हुआ था यह समझौता 4 मार्च 1816 को ऐतिहासिक संज्ञान में आया और सुगौली संधि के नाम से उभरा, उससे पहले 1814 ईo के मई महीने में बुटवल (नेपाली क्षेत्र) में एक उकसाने वाली घटना हुई, जिसे आधार बनाकर ईस्ट इंडिया कंपनी से हुई इसे आधार बनाकर ईस्ट इंडिया कंपनी के गवर्नर जनरल मार्क्स वेस्टिंगस नवंबर 1814 में नेपाल के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी, अंग्रेजी सेना की कप्तान जनरल मर्ली व मुलविनहुड के हाथों में थी तो नेपाल गोरखा सैनिक अमर सिंह थापा के नायकत्व में लगभग 30000 (तीस हजार) अंग्रेजी सैनिक टीक ना सके पहाड़ी क्षेत्रों में गौरव सेना अंग्रेजी सेनाओं पर भारी पड़ रहे थे, गवर्नर जनरल मार्किस हेकटिंग्स ने लार्ड आक्टर जो कि नेपाली सेना के विरुद्ध अभियान चलाने की आदेश दिया, जिसने मई 1815 में मालने के दुर्ग पर अधिकार कर लिया । और नेपाल के सेनापति अमर सिंह थापा ने आत्मसमर्पण कर दिया, सभी जनरल करेजी के नेतृत्व में 8000 सैनिकों ने चंपारण के सीमावर्ती नेपाली क्षेत्रो में युद्ध के नए मोर्चे के प्रवाह क्षेत्र में पड़नेवाला यह भू-भाग अपेक्षाकृत समतल और उपजाऊ था । करेली ने लगभग सभी तराई क्षेत्र अपने कब्जे में ले लिया । परिणाम सुगौली संधि अस्तित्व में आया । 2 दिसम्बर 1815 को अंग्रेजो का प्रनिधित्व जनरल डाल्टर सोनी एवम नेपाल क्षेत्र का प्रनिधित्व उनके पुरोहित गजराज मिश्र ने किया । संधि के पश्यात भी संघर्ष पूर्णतः समाप्त नही हो सका । नेपालियों के एक मजबूत छावनी मकवानपुर पर जब अंग्रेजो को विजय मिली तब नेपाल सैनिक संधि प्रस्ताव स्वीकारने को मजबूर हुए। नेपाल को मकवानपुर के निर्णायक हार 28 फरवरी 1816 को मिली । 4 मार्च 1816 को संधि को कुछ संसाधनो के पश्च्यात दोनो पक्षो द्वारा स्वीकार किया गया । 4 मार्च 1816 को अतीत में 2 दिसम्बर 1815 को हुई संधि को कुछ संसाधनों के पश्च्यात दोनो पक्षो द्वारा स्वीकार लिया गया । इस तरह सुगौली में सम्पन 2 दिसम्बर 1815 की संधि सुगौली संधि के नाम से अंकित हो गया ।इस संधि में नेपाल अपने भू-भाग का लगभग एक तिहाई भाग खो दिया था जिसमें हुमायूं, गढ़वाल, शिमला ,सिक्किम तथा दक्षिण के तराई क्षेत्र सम्मिलित थे,सन 1816 के अंत तक तराई के कुछ भाग नेपाल को लौटा दिए गए 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों का साथ देने के एवज में नेपाल ने कुछ भू-भाग कंपनी से प्राप्त किए।

हाल ही में काला पानी विवाद ने नेपाल में बड़े जन आंदोलन की रूपरेखा तैयार की उसके मूल में सुगौली की संधि ही है कालापानी उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में 35 वर्ग किलोमीटर जमीन है, यहां इंडो-तिब्बत बॉर्डर पर पुलिस के जवान तैनात है। काली नदी का उदगम स्थल कालापानी ही है । भारत ने इस नदी को अपने नए नक्शे में शामिल किया है। सुगौली_संधि में काली नदी को पश्चिम सिमा पर ईस्ट इंडिया और नेपाल के बीच रेखांकित किया गया था। 1962 में भारत चीन युद्ध के समय भारतीय सेना ने कालापानी में चौकी बनाई । नेपाल के दावे के अनुसार 1961 में उसने इस क्षेत्र में जनगणना कराई थी, इस तरह यह सुगौली संधि का उलंघन बता रहा है और हाल ही में फिर से अपने नक्शा से उसे हटा दिया है और ये भारत और नेपाल के साथ क्या चल रहा है कुछ समझ में ही नही आ रहा है।

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