राजद का नीतीश पर दलितों के खिलाफ अत्याचार को लेकर बड़ा हमला

पटना । आरजेडी के दलित नेताओं ने नीतीश सरकार पर हमला बोला‌। कहा कि बिहार में दलितों के साथ अत्याचार हो रहा है। यही नहीं दलित समाज से आने वाले अधिकारियों को घोटाले में फंसाकर सरकार परेशान कर रही है।

उदय नारायण चौधरी ने कहा कि डबल इंजन की सरकार में दलित पिछड़ों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हुआ है। दलित और आदिवासी छात्रों की छात्रवृत्ति बंद कर दिया गया। इस समाज के सरकारी नौकरियों में बैकलॉग के पद को नहीं भरा गया। बिहार में ट्रैप केस में दलित और आदिवासी को पकड़ा गया है। 167 दलित आदिवासियों को ट्रैप में अधिकारियों और पदाधिकारियों को पकड़ा गया। बिहार में शराब केस में 70 हजार दलितों पर केस दर्ज हुआ।

रमई राम ने भी नीतीश पर हमला बोला और कहा कि नीतीश सरकार ने दलितों में बंटवारा किया। दलित और महादलित के रूप में जो किसी सरकार ने नहीं किया। नीतीश सरकार में दलितों को जमीन नहीं दी जा है। मैं नीतीश कुमार को चैलेंज करता हूं। दलितों को दी गई जमीन पर उनका कब्जा नहीं है। अगर सरकार कब्जा दिखा देती है तो मुझे फांसी दे दिया जाए।

श्याम रजक ने कहा कि दलितों पर अत्याचार का आंकड़ा बढ़ गया है। 2005 में 7 प्रतिशत था अब वह बढ़कर 17 प्रतिशत हो गया है। बिहार दलितों के अत्याचार पर तीसरे स्थान पर है। जो मैं आंकड़ा दे रहा हूं वह भारत सरकार का है। आरक्षण में प्रोन्नति का मामला 11 साल से लंबित है। नई शिक्षा नीति के तहत दलित और वंचित शिक्षक नहीं बन पाएंगे। क्योंकि निजी हाथों में शिक्षण संस्थान जा रहे हैं। कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर काम लेने का काम कर रही है। सरकार आरक्षित पदों को भी कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर काम लेकर भरने का काम कर रही है। बिहार के किसी भी चयन आयोग में अनुसूचित जाति जनजाति के लोग नहीं है। इस लिए हमारी मांग है कि सभी चयन आयोगों में एक एक पद दलित वर्ग के लिए आरक्षित हो। श्याम रजक ने कहा कि बिहार का बजट का मात्र 11 प्रतिशत ही खर्च हुआ है। बिहार में अधिकारियों के बीच पैसों का बंदरबांट हो रहा है। बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन ओर पुलिस चयन आयोग में कोई भी सदस्य अनुसूचित जाति जनजाति का नहीं।

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