कृषि कानून को किसान विरोधी बताते हुए पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल ने लौटाया पद्मविभूषण सम्मान

स्वराज भारत लाइव डेस्क : कृषि कानून के खिलाफ किसान या आम लोग ही नहीं अब देश के आला नेता भी खुल कर सामाने आ गए हैं। केंद्र सरकार द्वारा पारित नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन लगातार आठवें दिन जारी है। कई राजनीतिक दल इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। ताजा मामला है पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और अकाली दल के वरिष्ठ नेता प्रकाश सिंह बादल का, जिन्होंने कृषि कानून के विरोध में अपना पद्म विभूषण सम्मान वापस कर दिया है। अकाली दल के नेता के विरोध के बाद कृषि कानूनों के खिलाफ देश में किसानों का आंदोलन बढ़ता जा रहा है।

खबर के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने 2 दिसंबर को मुक्तसर के अपने गांव बादल से राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी थी। प्रकाश सिंह बादल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को करीब तीन पन्ने की चिट्ठी लिखते हुए कृषि कानूनों का विरोध किया, किसानों पर एक्शन की निंदा की और इसी के साथ अपना सम्मान वापस दिया।

आपको बता दें कि उनके इस कदम के बाद से किसानों के आंदोलन ने एक नया मोड़ ले लिया है। प्रकाश सिंह की ओर से कृषि कानून किसानों के हित में नहीं बताया किया और ये कहते हुए अपना सम्मान वापस राष्ट्रपति को भेज दिया है। प्रकाश सिंह बादल पहले भी अपना विरोध जता चुके हैं, अब ऐसे में राजनीतिक गलियारों में अब कृषि कानून को लेकर नए सिरे से गर्माहट देखने को मिलेगी।

प्रकाश सिंह बादल पंजाब के एक कद्दावर नेता हैं और भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन का श्रेय उन्हीं को जाता है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके रिश्ते काफी अच्छे थे। हालांकि अपने बेटे सुखबीर बादल को पार्टी की कमान देने के बाद से बादल इन दिनों राजनीतिक गतिविधियों से दूर थे। प्रकाश सिंह बादल पांच बार पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनकी पार्टी एनडीए के पहले सहयोगियों में से थी। सौम्य स्वभाव के बादल राजनीतिक समस्याओं को धैर्य से सुलझाने में महारत रखते हैं।

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