किसान व बेरोजगारों को पौधा तैयार करने की ऑनलाइन दी गई ट्रेनिंग,कर सकते नर्सरी का व्यवसाय

नालन्दा (बिहार)हरनौत– कृषि विज्ञान केंद्र में जिले के 50 किसान व बेरोजगार युवकों को पौधा प्रवर्धन और मशरुम उत्पादन तथा व्यवसाय के गुर सिखाये गये। इन्हें इसकी ऑनलाइन ट्रेनिंग दी गई।
बागवानी विशेषज्ञ डॉ विभा रानी ने बताया कि कलमी पौधा तैयार करना ही पौधा प्रवर्धन है। ग्राफ्टिंग व गुटी बांधना पौधा तैयार करने का तरीका है।
ग्राफ्टिंग विधि से हम आम के किसी भी बीजू पौधे में अधिक फलदार पौधे के बीजू पौधे के तने के बराबर मोटाई का तना काटकर जमीन के एक से डेढ़ फीट ऊपर बांध देते हैं। कुछ समय के बाद कटा तना उसी बीजू पौधे का रुप ले लेता है। वह अपने माता पौधे के जैसा ही फलदार होता है। गुटी बांधना विधि में हम नींबू, अमरुद, करौंधा के तने को काटकर उसका निचला हिस्सा छिल देते हैं। इसके बाद छिले हिस्से पर मिट्टी अथवा वर्मी कंपोष्ट देकर उसे पॉलीथिन आदि से बांधकर रख देते हैं। जब उसमें जड़ निकलना शुरु होता है तो हम उसे कहीं भी लगा सकते हैं।

पौधा तैयार करने के महत्वपूर्ण कारक

डॉ० विभा रानी ने बताया कि नया पौघा तैयार करने में वातावरण में उपस्थित आर्द्रता, तापक्रम, प्रकाश व मातृ पौधे की आयु महत्वपूर्ण कारक होते हैं। इसे आसानी से बढ़ने के लिये हम इनडोल ब्युटाटिक एसिड का प्रयोग कर सकते हैं।

कलमी पौधे होते हैं अधिक फलदार

कृषि वैज्ञानिक डॉ उमेश नारायण उमेश ने बताया कि कलमी पौधे बीजू पौधे से अधिक फलदार होते हैं। बीजू पौधे को फल देने में सात से आठ वर्ष का समय लगता है। जबकि कलमी पौधे सालभर में ही फल देने लगते हैं। हालांकि, कलमी पौधे की अच्छी बढ़वार के लिये उससे दो से तीन साल तक फल नहीं लेने चाहिये। अगर फल अधिक आयें तो कुछ फल तोड़ लेने चाहिये।

वर्तमान समय में प्रासंगिक है नर्सरी व मशरुम उत्पादन

केंद्र प्रभारी डॉ ब्रजेन्दु कुमार ने बताया कि वर्तमान समय में पौधे तैयार करना प्रासंगिक विषय है। पेड़-पौधे किसी भी क्षेत्र के जलवायु को नियंत्रित करने में मुख्य भुमिका निभाते हैं और सजीवों के अनुकूल बनाते हैं। इस दृष्टिकोण से पौधों की नर्सरी एक अच्छा व्यवसाय बन सकता है।
वहीं, मशरुम उत्पादन कम लागत व ऊर्जा की खपत में एक अच्छा व्यवसाय है। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बच्चों में कुपोषण दूर करने के साथ बच्चे व बुजूर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने का महत्वपूर्ण साधन बन सकता है।

मशरुम की खेती कर बन सकते हैं समृद्ध

केंद्र की गृह वैज्ञानिक डॉ ज्योति सिन्हा ने बताया कि कम लागत व मेहनत में मशरुम उत्पादन कमाई का बेहतरीन जरिया है। खासकर महिलायें घर बैठे इसे आसानी से कर सकती हैं।

मशरुम उत्पादन के लिये बीज भी आसानी से उपलब्ध हैं। जिले के राजगीर व चंडी प्रखंड के किसान इसके आदर्श आइकॉन हैं।
अस्सी रुपये प्रति किग्रा बीज से आठ से दस पैकेट तक मशरुम उत्पादन कर सकते हैं। यानि चार गुना तक शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं।

स्वास्थ्य के लिये बेहतरीन खाद्य पदार्थ

डॉ० ज्योति सिन्हा ने बताया कि सौ ग्राम मशरुम में 14.4 ग्राम तक प्रोटीन शरीर को मिलता है। इसके अलावा विटामिन बी के विभिन्न घटक, विटामिन डी, कैल्शियम, लौह तत्व, मैग्नीशियम व जिंक पर्याप्त मात्रा में मिलते हैं। इससे प्राप्त एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में गुणात्मक वृद्धि करता है।
सुपाच्य होने के कारण यह बच्चों से लेकर बुजूर्ग तक के लिये उपयोगी है।

रिपोर्ट – गौरी शंकर प्रसाद

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