नवनिर्मित सत्तर घाट महासेतु के एप्रोच सड़क के ध्वस्त होने पर पुष्पम प्रिया चौधरी ने ट्वीट कर कहा “विश्वास का सेतु” टूट रहा है

पटना : ‘हम विश्वास का सेतु बनाते हैं’ का दावा करने वाली  बिहार सरकार का दावा ध्वस्त होता दिखा जब 30 दिन पहले नवनिर्मित सत्तरघाट पुल की एप्रोच सड़क गंडक नदी के पानी का दबाव सह नहीं पाया और बैकुंठपुर के फ़ैज़ुल्लाहपर में यह ध्वस्त हो गया. इसपर प्लुरल्स पार्टी की प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी ने ट्वीट करके लिखा कि “विश्वास का सेतु” टूट रहा है. इसके कारण आवागमन पूरी तरह बाधित हो गई है और चंपारण, सारण और तिरहुत से संपर्क भी टूट गया है. जब विश्वास ही टूट रहा है तो संपर्क की क्या बात करें. कुछ दिन पहले बिहार की भावी मुख्यमंत्री पुष्पम प्रिया चौधरी इस क्षेत्र के दौरे पर थी.


सनद रहे कि 20 अप्रैल 2012 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गंडक उर्फ़ नारायणी नदी पर सत्तरघाट महासेतु  का शिलान्यास किया था. बिहार राज्य पुल निर्माण निगम द्वारा पुल का निर्माण वशिष्टा कंस्ट्रक्शन कंपनी से कराया गया. 263.43 करोड़ की लागत से बने 1440 मीटर लंबे इस महासेतु का उदघाटन होने से गोपालगंज, सारण, पूर्वी चंपारण,  मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी तथा शिवहर जिलों के करीब 40 लाख से अधिक की आबादी को फायदा होने की बात कही गई थी. सत्तरघाट पुल बनने के बाद तिरहुत और सारण प्रमंडलों के बीच आवागमन सुगम होती पर बिहार सरकार के इस निर्माण ने अब दुर्गम कर दिया है.


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से 16 जून 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चंपारण के सत्तर घाट पुल का उद्घाटन किया था. 263.47 करोड़ रुपये की लागत से गंडक नदी पर निर्मित इस पुल की एप्रोच सड़क एक माह भी टिक नहीं सकी. उद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार में सड़कों व पुलों का जाल हमने बिछा दिया है, पुल-पुलिया का जाल बिछा हुआ है, हम लोग पुल ही नहीं बनाते बल्कि उसकी मरम्मत पर भी ध्यान देते हैं , परंतु एप्रोच सड़क एक माह भी न चल सकी. यह सरकार की कथनी और करनी को भी बताती है.


पुष्पम प्रिया चौधरी के ट्वीट पर हर तरह की प्रतिक्रिया आ रही है.
मधुभूषण तिवारी ने लिखा कि बिहार के वोटर इसके लिए दोषी हैं, धर्मेश सुमन ने लिखा बस माल लूटने का मक़सद से ब्रिज बनवाया था क्या?, नितेश भारद्वाज ने नीतीश कुमार को देश का सबसे बड़ा घोटालेबाज़ बताया. शंभु पटवा ने लिखा कि विकास की गंगा में बह गया यह महासेतु और भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ गए यह महासेतु, आमिर हसन ने लिखा ‘विश्वास का सेतु टूटने के साथ तैर भी रहा है’. सुनील ने लिखा ‘मरे हुए समाज की सत्ता का कोई विश्वास नहीं होता’.

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