शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव के नाम पर अपराधी सोशल मीडिया पर मांग रहे पैसा, दर्जनों लोगों को भेजा मैसेज

पटना, स्वराज भारत लाइव डेस्क : शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार के नाम पर साइबर अपराधी पैसा मांग रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक फर्जी आईडी बनाकर दर्जनों लोगों से पैसा मांगने की बात सामने आ रही है। वह इस आपराधिक वारदात में कितना कामयाब हो पाए यह तो जांच के बाद पता चलेगा, फिलहाल प्रधान सचिव संजय कुमार ने जांच कर कार्रवाई के लिए साइबर सेल में शिकायत की है। प्रधान सचिव ने खुद इसकी जानकारी सोशल पर मीडिया पर साझा करते हुए लोगों को अगाह किया है।

साइबर अपराधियों ने सोशल मीडिया के एक प्लेटफार्म पर पहले शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार की फर्जी आईडी तैयार की। इसमें संजय कुमार की फोटो के साथ उनके बारे में जानकारी भी दी गई। साइबर अपराधी पहले इस सोशल मीडिया प्लेटफार्म से लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज रहे हैं, इसके बाद उनसे पैसों की डिमांड कर रहे हैं। साइबर अपराधियों ने दर्जनों लोगों को पैसे के लिए संजय कुमार के फर्जी अकांउट से मैसेज भेजा है।

प्रधान सचिव संजय कुमार को पता भी नहीं चलता कि उनके नाम पर किस तरह से साइबर अपराधी पैसे की डिमांड कर रहे हैं। ऐसे मामलों में अपराधियों की मंशा का खुलासा तभी होता है, जब मैसेज मिलने के बाद कोई क्रास चेक करने के लिए संबंधित व्यक्ति को फोन लगाता है। इस मामले में भी ऐसे ही हुआ है। क्रॉस चेकिंग में ही मामले की जानकारी प्रधान सचिव को हो पाई है।

बिहार में साइबर अपराधियों का जाल सक्रिय हैं। प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर ही साइबर थाने भी बनाए गए लेकिन उससे भी अपराधियों पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है। आए दिन ऐसे बड़े मामले सामने आ रहे हैं। साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने में साइबर सेल की तैयारी भी फेल काम नहीं आ रही है। कई बड़े अधिकारियों और संस्थानों की वेबसाइट तक हैक करने के मामले पूर्व में सामने आए हैं।

5 मार्च 2020 को साइबर
अपराधियों ने मुंगेर के DIG मनु महाराज के नाम से सोशल मीडिया अकाउंट बनाया था। अपराधी इसके जरिए एक निजी कोचिंग का प्रचार-प्रसार व अन्य कई गलत काम करते थे। इस मामले में गया के रामजी मार्केट बेलागंज से दो अपराधियों को गिरफ्तार किया था।

9 मई 2020 को साइबर अपराधियों ने बिहार के तत्कालीन DGP गुप्तेश्वर पाण्डेय के नाम पर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बना दिया था। चौकाने वाली बात यह थी कि इस फर्जी अकाउंट के करीब 10 हजार फॉलोअर भी हो गए थे। मामला संज्ञान में आते ही शास्त्रीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस के सक्रिय होते ही फेसबुक पर जिस आईडी से फर्जी अकाउंट बनाया था उसे डिलीट कर दिया।

15 मई में 2020 को साइबर अपराधियों ने बांका के DM सुहर्ष भगत के नाम से फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बना लिया था और लोगों से पैसे मांगता था। डीएम ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करवायी। जिसके बाद टेक्निकल सेल की टीम ने दरभंगा के नेहरा थाना क्षेत्र से एक युवक को गिरफ्तार किया था।

3 अगस्त 2020 को बिहार के प्राथमिक शिक्षा निदेशक रंजीत कुमार सिंह के नाम से एक फर्जी सोशल मीडिया अकांउट बनाया गया था। इस मामले को लेकर पटना में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई थी। IAS रंजीत कुमार सिंह ने खुद इस बात की जानकारी अपने सोशल मीडिया पेज पर दी थी।

26 अगस्त 2020 को साइबर अपराधियों ने मुंगेर के तत्कालीन DM राजेश मीणा को अपना शिकार बनाया था। उनके नाम से फर्जी अकाउंट बना कर लोगों से पैसों की डिमांड करता था। इसके बाद DM ने मामले में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी और अपने सोशल मीडिया अकाउंट से लोगों को साइबर अपराधियों के चक्कर में नहीं फंसने की अपील की थी।
ऐसे होता है फर्जीवाड़ा

साइबर अपराधी सबसे पहले लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट में लगे प्रोफाइल से उनकी फोटो डाउनलोड करते हैं, इसी बाद उसी नाम से फेक अकाउंट बनाकर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते हैं। बातचीत शुरू होती ही, खुद को किसी गंभीर समस्या में बताकर पैसों की मांग करते हैं। कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां साइबर अपराधी सोशल मीडिया पर अपनी बातों में ऐसे उलझाते हैं, लोग आसानी में झांसे में आ जाते हैं।

बिहार पुलिस की साइबर सेल ने सोशल मीडिया यूजर्स को अलर्ट किया है। पुलिस ने लोगों से अपील की है, सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय डोनेशन मांगने वाले मैसेज पर ध्यान न दें। अगर प्रोफाइल पर अधिक से अधिक जानकारी सार्वजनिक करने से बचें। अगर आपके नाम से कोई फर्जी अकाउंट बनाता है तो जल्द से जल्द इसकी सूचना अपने दोस्तों को दें और प्राथमिकी दर्ज कराएं।

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