के चन्द्रा का गुणगान आज भी करता हैं मोकामा

मोकामा। सेवानिवृत्त डीएसपी के. चंद्रा के आत्महत्या की खबर ने मोकामावासियों को सन 2000 के उन दिनों की याद दिला दी जब मोकामा में आए दिन गोलियां तड़तड़ाती थी। चंद्रा का मोकामा में रहा डेढ़ साल का कार्यकाल उनके पेशेवर जीवन की बड़ी उपलब्धि बनी। उस दौर में मोकामा में अपराधियों और पुलिस के बीच एनकाउंटर की असंख्यक घटनाओं ने चंद्रा को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की उपाधि दिला दी।

मोकामावासियों के लिए चंद्रा के आत्महत्या की खबर आश्चर्य की भांति रही। जो इंस्पेक्टर अपने हाथों में एके47 लहराते हुए दुर्दांत अपराधियों से आमने सामने की मुठभेड़ करता था वह अपनी जिंदगी की लड़ाई हार जाएगा , सहसा लोगों को विश्वास नहीं होता है।

सन् 1990 और 2000 के शुरुआती समय में मोकामा में अपराधियों के आपसी गैंगवार में हर सप्ताह किसी न किसी की हत्या होने से आम लोगों में दहशत का माहौल रहता। यहां तक कि वर्चस्व की लड़ाई में आम लोग और पुलिस वाले भी कई बार गोलियों के शिकार बने। दहशत के इसी दौर में 1 अक्टूबर 2002 को मोकामा थाना का प्रभार संभाला कृष्ण चंद्रा ने। कमान संभालते ही मोकामा का रूप बदल गया। जहां अब तक अपराधियों के गिरोहों के बीच वर्चस्व को लेकर गोलियां चलती थी वहीं अब एक ओर से पुलिस ने भी कई कुख्यात बदमाशों पर सीधी दबिश बनानी शुरू कर दी। चंद्रा के नेतृत्व में अब पुलिस का इकबाल बुलंद होने लगा था। नागा सिंह और नाटा सिंह जैसे वांछितों के गिरोह सहित कई अन्य नामी गिरामी बाहुबलियों के खिलाफ मानो चंद्रा ने सीधी जंग छेड़ दी।

शायद ही कोई दिन बीतता जब अखबार में चंद्रा के नेतृत्व वाली पुलिस और अपराधियों के बीच गोलीबारी की खबर नहीं छपती। अपने विशेष पुलिसिया स्टाइल के लिए चंद्रा ने खूब सुर्खियां बटोरी। मोकामा का बच्चा बच्चा तब एक ओर कई आपराधिक गिरोहों से वाकिफ हुआ तो दूसरी ओर पुलिस इंस्पेक्टर के रूप चंद्रा को जाना।

चंद्रा के डेढ़ साल के कार्यकाल में मोकामा थाना में आईपीसी की धारा 302 के तहत 25 मामले दर्ज हुए। इसमें गैंगवार में हत्या और एनकाउंटर में हुई मौत के करीब तीन दर्जन मामले रहे। इसी तरह अवैध हथियार जब्ती के 20 मामले दर्ज हुए और करीब तीन दर्जन हथियार बरामद हुआ। सूत्रों के अनुसार जब्त हथियारों में एके 47, एसएलआर और पिस्टल जैसे अत्याधुनिक हथियार शामिल रहे।

नाटा सिंह का एनकाउंटर रहा खास
सन 1980 के दशक से ही मोकामा में रमेश सिंह उर्फ नाटा सिंह एक दुर्दांत रंगदार माना जाता था। नाटा के करीब दो दशक के आपराधिक इतिहास में मोलदियार टोला और सकरवार टोला के प्रतिद्वंद्वी गिरोहों से गैंगवार में कई लोग मारे गए। चंद्रा के कमान संभालने के बाद नाटा का पुलिस से भी आमना सामना हुआ। और ऐसे ही एक मुठभेड़ में चंद्रा के नेतृत्व वाली पुलिस टीम नाटा सिंह को एनकाउंटर में मार गिराया। चंद्रा के लिए मोकामा में यह एनकाउंटर बेहद खास रहा।

नागा सिंह को न पकड़ पाने का मलाल
चंद्रा ने जब मोकामा की कमान संभाली तब मोकामा सहित बिहार में नागा सिंह आतंक का दूसरा नाम बन चुका था। 2002 से 2004 के बीच चंद्रा का सर्वाधिक बार नागा सिंह से मुठभेड़ हुआ। लेकिन हर बार नागा बच निकलने में कामयाब रहा। एक दौरान पुलिस की गोलियों से नागा सिंह के करीब डेढ़ दर्जन साथी ढेर हुए। मंटू सिंह, डिंगर सिंह जैसे कुख्यात बदमाश चंद्रा के साथ एनकाउंटर में मारे गए लेकिन नागा हाथ नहीं आया। अप्रैल 2004 में जब चंद्रा का मोकामा से तबादला हुआ तब उसने कहा था कि इसे नागा सिंह को न पकड पाने का अफसोस रहेगा।

विवादों से रहा नाता

अपराधियों पर नकेल कसने के दरम्यान कई बार ऐसे मौके भी आए जब आम पुलिस की सख्ती के शिकार बने। चंद्रा की आत्महत्या की खबर के बाद फिर से ऐसे लोगों का जख्म ताजा हो गया। मोकामा के काफी लोगों का मानना है कि चंद्रा ने तब जिस प्रकार की पुलिस सख्ती दिखाई वह पीपुल फ्रेंडली पुलिसिंग नहीं थी। ऐसे ही एक विवाद में चंद्रा के खिलाफ मोकामा के डॉक्टर रंजीत कुमार ने कोर्ट में मामला दर्ज कराया था और बाद में जीत हासिल की थी।

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