किसानों के साथ होते आ रहा है महा अन्याय : लक्ष्मण झा

सुपौल । बिहार प्रदेश किसान कांग्रेस के महासचिव सह कोसी संगठन प्रभारी लक्ष्मण कुमार झा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि
आज पूरे भारत के अंदर किसानों की यह हालत दयनीय क्यों है?
क्या किसान जो कि एक अन्नदाता है वह हम लोगों के देश का हिस्सेदार नहीं है ।

जबकि 1970 में गेहूं या और फसल की दाम ₹76 प्रति क्विंटल था जो 2015 में 45 साल बाद 1400/50 रुपैया क्विंटल हो गया । उतने ही दिन में सरकारी कर्मचारी का आय डीए और बेसिक वेतन 120 से 150 गुना बढ़ गया । वही 45 साल में स्कूल टीचर की तनख्वाह 280 से 320 गुना बढ़ गई कॉलेज की जो प्रोफेसर है। उनकी तनखा 150 से 170 गुना बढ़ गई ।

जबकि उसी 45 साल में किसानों की आय देखिए और सरकारी कर्मचारी को कि आज देखिए ।
प्रॉब्लम यह है कि किसानों की आय और कर्मचारियों की आए दोनों को तुलना करेंगे तो दोनों में 19 गुना की अंतर नजर आएगा । जबकि किसानों की आय अभी तक प्रति कुंटल 7600/ क्विंटल रुपैया बनता है अभी तक जो कि किसानों का उचित हक है।
कभी किसी ने पूछा है कि कॉरपोरेटिव को देने के लिए पैसा कहां से आता है सरकारी कर्मचारी को सातवां वेतन आयोग का पैसा कहां से आता है । लेकिन जब किसानों की आय के बारे में बोलेंगे तो उस पर सभी सरकार आज तक चुप्पी
साधते आई है ।

आज तक सभी सरकार ने किसानों को गुलाम बनाकर रखने का काम किया है । कभी आप लोगों ने सुना है कि किसानों को हाउस रेंट दिया गया है किसानों को एजुकेशन रेंट दिया गया है। किसानों को हेल्थ रेंट दिया गया है, मेडिकल रेट दिया गया है, नहीं ना। लेकिन सरकारी कर्मचारी को सभी फैसिलिटी दिया जाता है क्यों क्या किसान हम लोगों के देश के अंग नहीं हैं।

आज मैं उन सभी देश किसानों भाइयों को प्रणाम करता हूं जिन्होंने इतनी बड़ी उलझन का सामना करते हुए आज तक देश में अन्नदाता के रूप में सभी घर तक पहुंचाने का काम किया और सभी का भूख मिटाने का काम किया है।

मैं मांग करता हूं केंद्र सरकार में बैठे नरेंद्र मोदी जी से अगर आप किसान के हित में काम करते हैं तो आप किसानों की जो उचित आए हैं 7600/ क्विंटल वह देने की घोषणा करें साथ ही किसानों को हाउस रेंट , मेडिकल रेंट , एजुकेशन रेंट , हेल्थ रेंट देने की घोषणा करें ।

रिपोर्ट – कुणाल कुमार

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