इंट्री माफिया ने चेक पोस्ट पर तैनात मजिस्ट्रेट को किया अगवा करने का प्रयास

कैमूर । बिहार के कैमूर डीएम द्वारा एन एच पर ओवर लोडेड बालू ट्रक को रोकने के लिए मजिस्ट्रेट को तैनाती की गई थी। जहां 24 घंटे कई मजिस्ट्रेट तैनात रहते हैं।

इसी क्रम में में इंट्री माफिया सक्रीय होने से एक तरफ भारी पैमाने पर राजस्व का घाटा हो रहा तो दूसरी ओर ओवर लोड बालू की इंट्री को रोकने के लिए संवेदनशील अधिकारियों को माफियाओं द्वारा धमकी दिए जाने के मामले का भी खुलासा हुआ है।

अधिकारी द्वारा अपनी जान माल के क्षति की आशंका को दखते हुए इसकी आवेदन लिखित सूचना मोहनिया थाना को भी दी गई लेकिन सड़क से ले कर थाने तक माफियाओं की पहुंच से अधिकारी के आवेदन को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

बताया जाता है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर कैमूर ज़िले के मोहनिया चेकपोस्ट से ले कर रोहतास जिले के शिवसागर पखनारी चेक पोस्ट पर देर शाम होते ही तस्कर सक्रिय हो जाते है।
और शुरू हो जाता है ओवर लोड बालू की एंट्री का खेल,हालांकि कैमूर एसपी दिलनवाज़ अहमद के कड़े आदेश पर कुछ दिन पूर्व दर्जन भर तस्कर गिरफ्त में भी आए। जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी भी कई बार चेकपोस्ट पर पहुंच कर जांच की। लेकिन तस्करों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि प्रशाशन की सक्रियता की प्रत्येक सूचना मिलजाती है।विदित हो कि ज़िले के राष्ट्रीय मार्ग से सैकड़ो की संख्या में ओवर लोड लदे बालू यूपी की तरफ जाते है।

सरकार द्वारा नदी से बालू निकासी से ले कर वाहनों की क्षमता के अनुरूप नियामक भी बनाए गए है। लेकिन तस्करों के आगे सब फेल है। सूत्रों के अनुसार पता चल रहा है की इसमें सफेद पोश वाले का हाथ है तस्कर सन्ध्या होते ही राष्ट्रीय राजमार्ग पर सक्रिय हो जाते है।जो स्कार्पियो व दूसरी लक्सरी गाड़ियों से अधिकारियों व पुलिस पर नज़र रखते है,दो पहिया वाहन पर सवार युवक वाहनों के पासिंग का काम कराते है। शीर्ष इंट्री माफियाओं पर कार्रवाई नही होने से इनके हौसले दिनोदिन बढ़ते ही जा रहे है। जिसका अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है बीते 10 सितंबर की रात एनएच 2 पर चेकपोस्ट के पास दो स्कार्पियो पर सवार माफिया ड्यूटी पर तैनात एक मजिस्ट्रेट को जबरन उठा कर ले जा रहे थे ले ।

मजिस्ट्रेट के विरोध के बाद उनका आईडी कार्ड चेक किया गया तब जा कर उन्हें छोड़ा गया। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी ने बताया की स्कार्पियो सवार लोग किसी दूसरे अधिकारी की खोज में निकले थे। इस संबंध में मजिस्ट्रेट ने बताया कि स्कार्पियो पर सवार लोग शैलेन्द्र शर्मा की तलाश में आए थे।लेकिन मौके पर मैं मिल गया था ।मेरी आईडी कार्ड चेक करने के बाद वे लोग छोड़ दिए

खैर मामला जो भी हो लेकिन सुत्रो के अनुसार पता चल रहा है कि मामले को दबाने के लिए ऊपर से नीचे तक सफेदपोश वाले लगे हुए हैं। प्रश्न यह उठता है कि कैमूर प्रशाशन जांच कर मजिस्ट्रेट को न्याय दिलाने चाहिए नहीं तो शैलेंद्र शर्मा इतनी दहशत में है कि पूर्व में भी माफिया द्वारा उनकी बाइक छीनी गई थी। उस दहशत से निजात अभी तक नहीं मिली की कुछ इंट्री माफिया अपहरण करने के लिए तैयार हो गए मामले को इतने दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस प्रशासन का कोई एक्शन नहीं ऐसे जिला प्रशासन पर सवाल उठता है कि वह कौन सफेदपोश वाले हैं एक सरकारी कर्मी मजिस्ट्रेट का अपहरण करने की कोशिश की गई हो। थाने में आवेदन देने के बाद भी अभी तक करवाई शून्य रही है कहीं ऐसा तो नहीं इन सब माफिया के पीछे जिला प्रशासन का भी हाथ हो एक कार्यरत मजिस्ट्रेट शैलेंद्र शर्मा कि अपहरण करने की कोशिश की जा रही हो उस आवेदन पर अभी तक कार्रवाई नहीं की गई।

इस पर सवाल उठता है जिला प्रशासन के ऊपर कि ऐसे सरकारी कर्मी जो जान जोखिम कर 24 घंटे कार्य कर रहे हो उनके ऊपर खुलेआम स्कॉर्पियो में सवार माफिया अपहरण करने की कोशिश की गई हो इसके बाद भी जिला प्रशासन चुप्पी साधी हुई है आख़िर क्या क्यू मामला दर्ज कर करवाई नही की जा रही है।

कैमूर से विवेक सिन्हा की रिपोर्ट

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