अगर आप बड़े पैरवी कार या अमीर नहीं हैं तो आपका कोई उपाय नहीं ।

If you are not big lobbying car or rich then there is no way for you.

विक्रांत कुमार की कलम से,✍️

ये तस्वीर बेहद मार्मिक और हृदयविदारक है, जो पटना के आगमकुआँ के एक युवक ने भेजी है। यह तस्वीर बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की भी पोल खोलती है। हर दिन हम आपको सरकारी अस्पताल की स्थिति से आपको रूबरू करवाते हैं । सरकारी व्यवस्था की प्रतिदिन पोल खुल रहीं हैं , सरकार के पास एम्बुलेंस तक नहीं है, जितने भी एम्बुलेंस हैं बड़े – बड़े पॉलिटिशियन के रिश्तेदारों के लिए या फिर वैसे लोग जिनकी खूब पैरवी हैं ।

यह तस्वीर जो आप देख रहें हैं ये काफी है सरकार की लाचार व्यवस्था को बताने के लिए । तस्वीर में साफ देख रहें है कि तरह से यह व्यक्ति बाइक पर ऑक्सीजन सिलिंडर लगाकर जाने को मजबूर है। आप सोचिए यह जो ऑक्सीजन सिलेंडर भी हैं क्या यह इन्हें सरकारी या प्राइवेट अस्पताल से उपलब्ध हुआ होगा , नहीं यह सिलेंडर भी सामाजिक संगठनों की ओर उपलब्ध करवाया गया ।

सरकार आज कहती हैं कि कोरोना हैं इससे बड़े देश अमेरिका भी इस महामारी का सामना नहीं कर पाया तो भारत क्या कर पाएगा । जब हम स्वास्थ्य व्यवस्था को दूसरे देश से तुलना करते हैं तो क्या विकास में हम दूसरे देश से क्यों तुलना न करें । आज बात कोरोना की होती हैं ।

भारत तो वो देश हैं कि जहां बुखार आने पर भी आम लोगों को इलाज सही से नहीं हो पाती हैं । वही कई दिनों से प्रतिदिन सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य व्यवस्था के लाचार स्थिति को देखने को मिल रहा हैं कि मरीज को न बेड मिल रहा है न तो ऑक्सीजन सिलेंडर लेकिन सोमवार की बात हैं पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जैसे ही कोरोना पोजेटिव निकले तुंरत ही उन्हें बहुत ही सुविधापूर्वक उन्हें स्पेशल बेड उपलब्ध दिल्ली एम्स में करवाया गया । क्यों अब बेड कहा से आ गया क्यों आम आदमी के लिए बेड नहीं था क्या आम आदमी सिर्फ आपको वोट इसलिए करता हैं कि आप बड़े अस्पताल में ac रूम में इलाज करवाये और वे फुटफाट पर बीमारी से लड़ अपना दम तोड़ दें ।

वही प्राइवेट अस्पताल में मनमाने तरीके से पैसा वसूला जाता हैं क्या इससे अनजान हैं आप । बहुत पहले से अस्पताल और हेल्थ सेक्टर को दुरुस्त करने की लड़ाई लड़ता रहा हूँ। लेकिन सरकार को इससे क्या मतलब , वो तो मेडिकल माफिया की बात ज्यादा सुनती है। इसका खामियाजा आज जनता भुगत रही है।

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