हरनौत बाजार की योजनाओं पर मारी कुंडली, चार वर्ष बाद भी नहीं मिली वार्ड समिति को पर्याप्त राशि

  • पंचायत में पड़े हैं लाखों पर रुपये
  • बंदरबांट की आशंका

नालंदा (बिहार) : हरनौत में मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना से वार्ड स्तर पर नाली-गली व हर घर नल का जल के लिए लाखों रुपये दिये गये हैं। प्रखंड के कर्मठ पंचायत प्रतिनिधियों के द्वारा प्राथमिकता से योजना बनाकर काम कराया गया। पर, हरनौत बाजार पहुंचते ही योजनाएं दम तोड़ती नजर आती है। यहां सबनहुआ के चार से पांच वार्डों की सीमा पड़ती है। पर, कहीं-भी नाली-गली व नल-जल के काम की शुरुआत तक नहीं हुई है। यह अलग बात है कि हर वर्ष छह से सात महीनों तक बाजार के कई मोहल्ले जलजमाव से घिरे रहते हैं। इससे पीने का पानी तक संक्रमित हो रहा है। बाजार वासियों में पेट और त्वचा रोगों की समस्या बढ़ रही है। जबकि, वर्ष 2016 में हुये पंचायत चुनाव के बाद अब अगले चुनाव में एक वर्ष से भी कम समय बचा है। जबकि, संबंधित वार्ड सदस्य मुंह छिपाते फिर रहे हैं। उनका कहना है कि वार्ड में विकास कार्यों के लिए मुखिया के द्वारा समय पर पर्याप्त राशि वार्ड सदस्यों को हस्तांतरित नहीं की गई। जबकि, नल-जल के लिए स्थल चिन्हित करने के बाद भी अब तक काम शुरू नहीं किया गया है। अफसर भी बाजार क्षेत्र की समस्याओं पर आंख मूंद लेते हैं।


जानकारों की मानें तो मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना से नाली-गली व हर घर नल का जल योजना को हर गांव-टोला तक पहुंचाना है। इसके लिए वार्ड स्तर पर वार्ड प्रबंधन एवं क्रियान्वयन समिति बनाई गई है। इसमें संबंधित वार्ड सदस्य अध्यक्ष होते हैं। जबकि, वार्ड सभा करके कम से कम दसवीं उत्तीर्ण वार्ड निवासी को सचिव बनाया जाता है।
इसके बाद वार्ड के तमाम क्षेत्रों का भौतिक सत्यापन करके वहां नाली-गली आदि का एस्टीमेट बनाया जाता है। यह काम पंचायत स्तर के टेक्निकल असिस्टेंट करते हैं।
इसके बाद पंचायत के मुखिया को वार्ड स्तर योजना के एस्टिमेट की राशि का साठ फीसदी संबंधित वार्ड सदस्य के खाते पर हस्तांतरित करनी होती है।


अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर एक वार्ड सदस्य बताते हैं कि दो दिन पहले हरनौत बाजार में जलजमाव की खबर दैनिक भास्कर में प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी। उसी रात संबंधित वार्ड सदस्यों के खाते पर दो-दो लाख रुपये भेजे गये हैं। जबकि, वार्ड अंतर्गत काम के लिए करीब 12 लाख रुपये मुखिया के खाते पर मिले हैं। योजना का एस्टिमेट करीब 14 लाख का बताया जाता है। इसका साठ फीसदी आठ लाख के करीब होता है। पर दो लाख रुपये में किस तरह काम होगा। यह सोचने की बात है।

योजना की शुरुआत महादलित टोला से

जानकार बताते हैं कि वार्ड स्तर पर काम में पहले एससी-एसटी बहुल इलाकों में योजना को प्राथमिकता से पूरा करना है। इसके बाद अतिपिछड़ा बहुल वाले इलाकों को लेना है। बाजार में अंबेडकर नगर में महादलित टोला है। वहां नाली-गली और नल-जल का काम हुआ है। जबकि शेष इलाकों में अतिपिछड़ा की बहुलता है। इसके बाद भी अभी तक बाजार के लोग सुविधा से वंचित हैं। बरसात में घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो जाता है। निकास के अभाव में कई मोहल्ले में पानी घरों में प्रवेश कर जाता है।
अब जबकि पंचायत चुनाव में एक वर्ष से भी कम समय बचा है तो योजना की राशि के बंदरबांट की आशंका बढ़ गई है।

क्या कहते हैं अधिकारी

बीडीओ रवि कुमार ने बताया कि इस संबंध में ग्राम पंचायत राज पदाधिकारी को छानबीन कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे।

रिपोर्ट – गौरी शंकर प्रसाद

https://youtu.be/rTGC5zYJncA

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