ऐतिहासिक ” भारत बन्द “

पटना । कृषि कानून के खिलाफ विभिन्न किसान संगठनों के आह्वान पर आयोजित आज का ” भारत बन्द ” अभूतपूर्व और ऐतिहासिक रूप से सफल रहा। राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष जगदानन्द सिंह ने किसानों के साथ खड़ा हो कर ” भारत बन्द ” को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए समस्त बिहार वासीयों को बधाई दिया है।

राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा है कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार किसानों के सवाल पर इस प्रकार का ” भारत बन्द ” देखा गया जिसे विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों , कर्मचारी और मजदूर संगठनों के साथ हीं विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय समाजिक कार्यकर्ताओं का व्यापक समर्थन मिला और बन्द का असर छोटे-बड़े शहरों से लेकर गांवों के चौक-चौराहे तक दिखाई पड़ा ।

राजद प्रवक्ता ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव के निर्देशानुसार राजद द्वारा आज के बन्द का सक्रिय समर्थन किया गया था। बन्द को ऐतिहासिक बनाने में राजद की सक्रिय भागीदारी रही। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव और प्रदेश अध्यक्ष जगदानन्द सिंह के निर्देश पर पार्टी के सभी विधायक, नेता, कार्यकर्ता और पार्टी के विभिन्न इकाईयों के पद-धारक अपने-अपने कार्य और प्रभाव क्षेत्रों में किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर भारत बन्द को सफल बनाने में लगे रहे।

राजधानी पटना में भी राजद कार्यकर्ताओं द्वारा अपने अपने मोहल्ले में ग्रुप बना कर बन्द मे सहयोग करने का अपील किया गया। मुख्य रूप से पार्टी के राज्य कार्यालय से राजद कार्यकर्ताओं का एक बड़ा जत्था पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता मृत्युन्जय तिवारी, किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष सुबोध यादव, महिला प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ उर्मिला ठाकुर, पटना जिलाध्यक्ष देवमुनी सिंह यादव, प्रदेश महासचिव निराला यादव, मदन शर्मा, डॉ प्रेम गुप्ता, संजय यादव, निर्भय अम्बेडकर, डॉ राहुल सिंह के नेतृत्व में कृषि कानून को वापस लेने सम्बन्धी नारा लगाते क नगर के विभिन्न मार्गों से प्रदर्शन करते हुए डाकबंगला चौक पहुँचे । जहाँ आयोजित नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए कृषि कानून को वापस लेने की माँग की गई।

राजद प्रवक्ता ने कहा कि यह आन्दोलन मात्र किसानों का आन्दोलन नहीं है बल्कि इसका प्रभाव समाज के सभी वर्गों पर पड़ने वाला है। केन्द्र द्वारा लाये गये कृषि कानून से किसान-मजदूरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। और जब किसानों का अस्तित्व हीं नहीं रहेगा तो फिर गांवों का अस्तित्व कैसे बचेगा। इसलिए गांवों के अस्तित्व को बचाने के लिए भी हमें किसानों के आन्दोलन के साथ खड़ा होना पड़ेगा ।

रिपोर्ट – स्वेता मेहता

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