महारानी अहिल्या बाई होल्कर की 295 वीं जयंती दी हार्दिक शुभकामनाएं, रूद्र शक्ति सेना ने दी

बागी बलिया (उत्तर प्रदेश) । महारानी अहिल्या बाई होल्कर जयंती: ऐसी शासक जो थीं महान दार्शनिक और कुशल राजनीतिज्ञ आज 31 मई को महारानी अहिल्या बाई होल्कर की 295 वीं जयंती पर रूद्र शक्ति सेना सामाजिक के संस्थापक महोदय श्री अनमोल हिन्दू ने दी ट्वीट कर हार्दिक शुभकामनाएं समस्त देश वासियों को और राष्ट्रीय अध्यक्ष महोदय ने कहा महारानी अहिल्या बाई होल्कर का नाम भारतीय इतिहास की सर्वश्रेष्ठ योद्धा रानियों में शुमार है उनके शासनकाल के दौरान मराठा मालवा साम्राज्य ने सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ।

नारी शक्ति राष्ट्रीय सदस्य व उत्तर प्रदेश सलाहकार रीना हिन्दू ने ट्वीट कर दी आज 31 मई को महारानी अहिल्या बाई होल्कर की 295 वीं जयंती है हार्दिक शुभकामनाएं की बढ़ाई वही युवा शक्ति राष्ट्रीय सदस्य मुकेश हिन्दू,जिला बागी बलिया अध्यक्ष संदीप हिन्दू,जिला बागी बलिया मीडिया प्रभारी आनंद हिन्दू,जिला लखनऊ अध्यक्ष दीप चंद हिन्दू, ने भी ट्वीट एवं Facebook के माध्यम से दी हार्दिक शुभकामनाएं समस्त देश वासियों को और रूद्र शक्ति सेना सामाजिक संगठन के समस्त पदाधिकारी राष्ट्रीय पदाधिकारीयों ने बैठक मे समस्त नारी शक्ति परिवार एवं रूद्र सैनिकों को दी जानकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कॉल के मध्यम से लॉक डाउन का नियमों का पालन करते हुए सभी को क्या जानकारी साँझा की और सभी राष्ट्रीय पदाधिकारीयों ने कहा कि यह महत्पूर्ण जानकारियों को समस्त हिन्दुओ को खास कर समस्त हिन्दू महिलाओ को जागरूक करने के लिए न्यूज मीडिया का सहारा लिया और कहा कि महारानी अहिल्या बाई होल्कर का नाम भारतीय इतिहास की सर्वश्रेष्ठ योद्धा रानियों में शुमार है उनके शासनकाल के दौरान मराठा मालवा साम्राज्य ने सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ अहिल्याबाई होल्कर ने देशभर में कई हिंदू मंदिरों और धर्मशालाओं का निर्माण करवाया महारानी अहिल्या बाई होल्कर का जन्म 31 मई, 1725 को महाराष्ट्र के चौंडी (वर्तमान अहमदनगर) गांव में हुआ था अहिल्याबाई होल्कर अच्छी तरह से शिक्षित महिला थीं. जब वह 8 साल की थीं, तब उन्हें मल्हार राव होलकर (मराठा पेशवा बालाजी बाजी राव के सेना प्रमुख) देखने आए थे. इसके बाद जल्द ही मल्हार राव के बेटे, खंडेराव से उनकी शादी हो गई थी।

फिल 1745 में अहिल्याबाई होल्कर ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिनका नाम पुरुष राव रखा गया. लेकिन 19 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई. 1748 में, अहिल्याबाई होल्कर ने जात-पात की व्यवस्था से ऊपर उठकर एक गरीब परिवार के बहादुर लड़के यशवंत राव से अपनी बेटी की शादी करवाई।
अहिल्याबाई होल्कर ने 1754 में पति की मृत्यु के बाद सती होने का फैसला किया लेकिन उनके ससुर ने महारानी को ऐसा करने रोक दिया. मल्हार होल्कर की मृत्यु के बाद, उनके पुत्र नर राव को राजा बने और उनकी भी मृत्यु के बाद अहिल्याबाई ने 1767 में पदभार संभाला।
अहिल्याबाई एक बहुत अच्छी प्रशासक थीं और इंदौर शहर उनके शासनकाल के दौरान इसका गवाह बना, उन्होंने अपने राज्य में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में पानी की टंकियों, सड़कों, घाटों, धर्मशालाओं आदि जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए निर्माण करवाया।


अहिल्याबाई को ब्रिटिश इतिहासकार जॉन कीस ने ‘द फिलॉसोफर क्वीन’ की उपाधि दी. मालवा की महारानी अहिल्याबाई होल्कर दार्शनिक और कुशल राजनीतिज्ञ भी थीं, वो लगातार राजनीतिक परिदृश्य पैनी नजर बनाए रखती थीं,अहिल्याबाई होल्कर का 13 अगस्त, 1795 को 70 वर्ष की आयु में निधन हुआ था।

rudrashaktisena18@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

0Shares
0