विरोध से घबराए नीतीश कुमार ने चला राजनीति का आखिरी दाँव।

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के तीसरे और आखिरी चरण के मतदान के लिए कल चुनाव प्रचार समाप्त हो गया।चुनाव प्रचार के आखिरी दिन पूर्णिया में नीतीश कुमार ने मंच से घोषणा की कि ये उनका अंतिम चुनाव है।नीतीश कुमार भावुक अपील कर लोगों से समर्थन पाना चाहते हैं।पिछले करीब एक माह से प्रदेश में चुनावी प्रक्रिया चल रही है।लेकिन कभी भी नीतीश कुमार ने नहीं कहा कि ये उनका आखिरी चुनाव है।शायद चुनाव प्रचार के दौरान वो खुद के लिए पूरे प्रदेश में विरोध को भाँप चुके हैं।उन्हें अपनी पार्टी की बुरी तरह हार नजर आ रही है और इस बुरी हार की संभावना को देखते हुए नीतीश कुमार ने अपना आखिरी दांव चल दिया है।

(आलेख: अनुभव सिंह)


नीतीश कुमार चार दशक से भी अधिक समय से प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं।केंद्र सरकार में मंत्री रहे और पिछले 15 वर्षों से प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।अब जबकि नीतीश कुमार ने स्वयं घोषणा कर दी है कि ये उनका आखिरी चुनाव है,तो ऐसे में अब स्वाभाविक रूप से ये चर्चा होगी कि उन्होंने अपने नेतृत्व में बिहार को क्या दिया।ये सवाल जरूर होगा कि केंद्र में मंत्री रहते या फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते नीतीश कुमार ने इस मिट्टी का कर्ज चुकाया या नहीं।ये सवाल जरूर होगा कि नीतीश कुमार ने किन हालात में ये घोषणा की कि ये उनका आखिरी चुनाव है।उन्होंने स्वेच्छा से चुनावी राजनीति छोड़ने का फैसला किया या फिर उन्होंने अपना विरोध देखते हुए राजनीति छोड़ने का फैसला किया ?
अब जबकि चुनाव प्रचार के आखिरी दिन उन्होंने कहा कि ये उनका आखिरी चुनाव है, मतलब स्पष्ट है कि उन्हें बुरी तरह हार का डर सता रहा है और तब उन्होंने मतदाताओं से भावुक अपील की है कि अंत भला तो सब भला।नीतीश कुमार ने जब प्रदेश की सत्ता संभाली थी,तब लालू राज में बिहार की हालत बेहद खराब थी।अपने पहले कार्यकाल में नीतीश कुमार ने प्रदेश में शानदार काम किया।सबसे महत्वपूर्ण कि प्रशासनिक सुधार कर कानून का राज स्थापित किया।सड़कों को दुरुस्त किया और गांव-गांव तक बिजली पहुंचाई।ये तीन ऐसे महत्वपूर्ण काम हुए जिससे जनता के मन में नीतीश कुमार के लिए विश्वास पैदा हुआ और जनता ने पुनः 2010 के चुनाव में उन्हें बहुमत देकर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया।लेकिन अफसोस,नीतीश कुमार अपने पहले कार्यकाल में किए कामों की ही माला जपते रहे और 5 साल समाप्त हो गए।तीसरे और वर्तमान कार्यकाल में तो नीतीश कुमार की जो प्रतिष्ठा पहले कार्यकाल में बनी थी,उन्होंने खुद उसे खत्म कर दिया।उनका तीसरा कार्यकाल बेहद निराशाजनक रहा और हर वर्ग में नीतीश कुमार के लिए विरोध बढ़ा।प्रदेश में अपराध बढ़ा,हत्या और बलात्कार की घटना आम हो गई।बेटियां असुरक्षित हो गईं।शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई,प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई। अस्पतालों में चिकित्सक, चिकित्साकर्मी,बेड यहां तक कि आपातकालीन दवाइयाँ भी उपलब्ध नहीं रहती।प्रदेश के किसानों को बर्बाद करने में नीतीश सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी।प्रदेश में अपने 15 वर्षो के शासन में नीतीश कुमार एक भी कल-कारखाने नहीं लगा सके। बेरोजगारी की समस्या लगातार बढ़ती रही।रोजगार की तलाश में पलायन रोकने में नीतीश सरकार पूरी तरह विफल रही।शेल्टर होम में बलात्कार की घटना ने नीतीश सरकार पर एक और काला धब्बा लगाया।प्रदेश का हर कार्यालय भ्रष्टाचार के आगोश में समा गया,बिना रिश्वत छोटा से छोटा और बड़ा से बड़ा,कोई काम नहीं होता। प्रदेश में चल रही हर छोटी-बड़ी योजना पर बाहुबलियों का कब्जा हो गया।एक ओर जहां लालू राज में राजनीति का अपराधीकरण हुआ तो नीतीश कुमार ने राजनीति में बाहुबलियों को स्थापित किया।प्रदेश के ज्यादातर बाहुबली नीतीश सरकार के संरक्षण में खूब फले-फूले।सात निश्चय योजना,जल-जीवन-हरियाली, हर योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होता रहा और सरकार देखती रही। विकास के हर पैमाने पर बिहार फिसड्डी होता चला गया।आज जब लोजपा प्रमुख चिराग पासवान नीतीश कुमार से उनके आखिरी 5 साल का हिसाब मांग रहे हैं तो नीतीश कुमार बगले झांक रहे हैं।आज जब नीतीश कुमार की रैलियों में उनका विरोध हो रहा है तो नीतीश कुमार आपा खो रहे हैं और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।
दरअसल नीतीश कुमार ने प्रदेश के राजनीतिक विकल्पहीनता को देखते हुए खुद को प्रदेश का स्थायी मुख्यमंत्री समझने की भूल कर दी।आज नीतीश कुमार चारों ओर से घिर चुके हैं और उन्हें अपना राजनीतिक अंत स्पष्ट नजर आ रहा है तो वो राजनीति का आखिरी दांव चल कर जदयू प्रत्याशी को जिताने की भावनात्मक अपील कर रहे हैं।लेकिन शायद अब ये संभव नहीं है।प्रदेश की जनता जाग चुकी है।नीतीश कुमार का हश्र देख हर राजनेता को सीखना चाहिए।ये देखना चाहिए कि ये वही जानता है जो 2005 में नीतीश कुमार की जय जयकार कर रही थी,लेकिन आज वही जनता कह रही है,चलो अब सिंहासन खाली करो।जनता कह रही है कि हमने तो आपको बहुत मौके दिए,आपने क्या दिया ? आज भले नीतीश कुमार राजनीति छोड़ दें, लेकिन उन्हें ये सोंचना होगा कि क्या उन्होंने इस मिट्टी का कर्ज चुकाया।केंद्र में मंत्री रहते और प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते उन्होंने उस क्षेत्र का समुचित विकास किया,जिस क्षेत्र की जनता ने उन्हें राजनीति के क्षितिज पर पहुंचाया ?

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