चौदह महीने बाद भी योजना अधूरी, चंडी के घोरहरी गांव में नल-जल का हाल

नालंदा (बिहार)हरनौत- चंडी प्रखंड की बेलछी पंचायत के घोरहरी गांव में चौदह महीने बाद भी नल-जल का काम अधूरा है। इसका खामियाजा अक्सर लाभुकों को भुगतना पड़ता है। पिछले बीस दिनों से मोटर जला पड़ा है। इसका ठीकरा पंचायत पीएचईडी पर और पीएचईडी पंचायत के माथे फोड़ रही है। जिला पार्षद निरंजन कुमार जब गांव पहुंचे तो उन्हें भी ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ा।
जिला पार्षद ने बताया कि प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव में नल-जल योजना के लिए बोरिंग, सप्लाई पाइप बिछाने के अलावा 25 फीट ऊंचा वाटर टैंक और एक कमरा के लिए 14 लाख का एस्टीमेट बना था। इसके लिए काम करने वाली एजेंसी को मात्र नौ लाख रुपये मिले। इससे बोरिंग कर सप्लाई पाईप बिछाने का काम किया गया। पर वाटर टैंक और कमरे का निर्माण आज तक नहीं हुआ है। इसके लिए भी पंचायत और विभाग एक-दूसरे पर दोषारोपण करने में लगा है। मोटर का स्टार्टर खूले में रहता है। इस वजह से जब मन तब इसे चलाकर छोड़ दिया जाता है। परिणाम लाभुकों को भुगतना पड़ रहा है।

विकास कार्यों से उपेक्षित है गांव

देश की आजादी के सात दशक बाद भी बरसात के दिनों में खटिया ही एंबुलेंस का काम करती है। सूखे दिनों में वाहन चित्तरबिगहा-रुपसपुर होते किसी तरह गांव तक पहुंच सकते हैं। पर, मामूली बारिश होने से पैदल चलना भी मुश्किल होता है। ग्रामीण बताते हैं कि कोयलबिगहा के निकट मुहाने नदी पर मात्र आधा किमी लंबा पुल बने तो हमारी बड़ी मुश्किल आसान हो सकती है। वही रुपसपुर-घोरहरी मार्ग में लंबे पुल की दरकार होगी। गांव की कुछेक गलियों को छोड़ दें तो वहां एक ईंट भी लगाने का काम वर्षों से नहीं हुआ है। जिला पार्षद निरंजन कुमार ने बताया कि उनके मद से यहां दो गलियों में गली का काम क्या गया है। जबकि, उसके अलावा विकास कार्य से गांव कोसों दूर है। पूरा गांव एक ही वार्ड में आता है।

रिपोर्ट – गौरी शंकर प्रसाद

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