बंगाल में अराजकता के मद्देनजर राष्ट्रपति शासन में ही चुनाव हों आर के सिन्हा

गया । कल भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे0 पी0 नड्डा जी और पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय जी के काफिले पर, जो कि कलकत्ता से डायमंड हार्बर जा रहा था, जिस प्रकार तृणमूल कार्यकर्ताओं द्वारा घातक हमला किया गया, वह अशोभनीय और निन्दनीय ही नहीं है, शर्मनाक भी है। यह पूरी तरह सिद्ध करता है कि ममता बनर्जी का लोकतंत्र में रत्तीभर भी विश्वास नहीं रह गया है। जो विडीयो क्लिपिंग्स आई है, उसे आप देख सकते हैं कि बाजारों में दोनों तरफ बडे-बडे डंडों में तृणमूल कांग्रेस के झडें लगाकर तृणमूल के कार्यकर्ता खड़े है। पुलिस भी साथ ही खड़ी है और उन्ही डंडों से मोटरसाइकिल से जा रहे भाजपा कार्यकर्ताओं की जमकर पिटाई हो रही है। पुलिस मूक दर्शक है I काफिले पर लगातार पत्थर फेंके जा रहे है। यह सब हताशापूर्ण कार्य अब चलने वाला नहीं है। लोकतंत्र में यह कभी चला भी नहीं है। इंदिरा गांधी का दमन नहीं चला। बंगाल में जब सिद्धार्थ शंकर रे ने नक्सलियों का दमन करना शुरू किया तो मार्क्सवादियों की सरकार आ गई । जब मार्क्सवादियों ने दमन शुरू किया तो ममता दीदी की सरकार आयी और अब ममता बनर्जी भी वही गलत रास्ते अपना रही है, जो लोकतंत्र के लिए घातक सिद्ध होगा।

अत: अब जरूरत यह है कि इस गुंडागर्दी को नियंत्रित करने के लिये बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगे और शांतिपूर्ण तथा निष्पक्ष चुनाव का रास्ता तैयार हो।

रिपोर्ट – धीरज गुप्ता

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

0Shares
0