कईयों पर लटक रही निष्‍कासन की तलवार

लालू प्रसाद की गैरमौजूदगी में भी हुए चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के ताज को बरकरार रखने वाले तेजस्वी अब राजद को विचारधारा के स्तर पर भी समृद्ध करना चाहते हैैं। पुरानी लाइन को पीछे छोड़कर नए जमाने के अनुरूप बनाना है और यह तभी संभव है जब छोटी-छोटी कमियों को दूर कर लिया जाए। इसी मकसद से चुनाव के पहले उन्होंने रामचंद्र पूर्वे के बदले जगदानंद सिंह के हाथ में प्रदेश राजद की कमान सौंपी थी। इसी सोच के साथ छोटे-बड़े अबतक करीब दो दर्जन नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है और करीब इतने ही लोगों पर निष्कासन की तलवार लटक रही है।

तब क्या था : लालू प्रसाद के जमाने में बड़े से बड़े अपराध के लिए भी कोई सजा नहीं थी। लालू परिवार और पार्टी के खिलाफ बयान देने पर भी आंख मूंद ली जाती थी। यहां तक कि कारण बताओ नोटिस भी नहीं दिया जाता है। पार्टी छोड़कर अगर कोई चला जाता था तो उसके निष्कासन की विज्ञप्ति जारी कर सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती थी।

अब क्या है : सबसे पहले तेजस्वी ने राजद के पोस्टरों से लालू प्रसाद को हटाया। अब उन्हें भी हटा रहे, जिन्होंने चुनाव में राजद के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ अभियान चलाया और हराने की कोशिश की। नतीजे आते ही हार की समीक्षा हुई। पराजित प्रत्याशियों से वजह पूछी गई और बागियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। कई को बाहर कर दिया गया।

रिपोर्ट – स्वेता मेहता

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