फसल जलने पर नहीं मिला मुआवजा, किसानों ने सुविधा शुल्क मांगने का लगाया आरोप

नालन्दा (बिहार) – हरनौत प्रखंड की पचौरा पंचायत के मोबारकपुर गांव में आग लगने से करीब दो लाख की फसल जलकर बर्बाद हो गई थी। एक घटना को करीब तीन वर्ष और दूसरी के छह माह बीत चुके हैं। पर, आज तक उन्हें मुआवजे की अठन्नी तक नहीं मिली है। किसान इसके लिए सुविधा शुल्क मांगने का आरोप भी लगाते हैं। उमेश प्रसाद बताते हैं कि वर्ष 2017 में उनके धान की पुंज में आग लग गई थी। इसमें उन्हें करीब 70 हजार का नुकसान हुआ। मुआवजा के लिए चक्कर लगाकर थक गये। कोई सुनने वाला नहीं है।

इसी तरह छह महीने पहले अर्जुन प्रसाद, त्रिवेणी कुमार, अरविंद प्रसाद व शैलेश कुमार की चार बीघे में गेहूं की खड़ी फसल जलकर राख हो गई थी। यह आग बिजली तार की चिंगारी से लगी थी। इसमें करीब डेढ़ लाख का नुकसान हुआ था। पर, कार्यालय का चक्कर काटते चप्पल घिस गये। पर, मुआवजा नहीं मिला।
इस संबंध में सीओ अखिलेश चौधरी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांशतः परिवार बाहर रहते हैं। वे खेत इजारे अथवा बटाई पर दे देते हैं। फसल के नुकसान पर मुआवजा के लिए जमीन की रसीद के साथ जमीन मालिक का शपथ पत्र भी होना चाहिए, जिसमें यह वर्णित हो कि खेत उनका है। पर, खेती फलां किसान करते हैं।

जमीन मालिक इस तरह का स्पष्टीकरण नहीं देते हैं। नतीजतन अनुमंडल कार्यालय से मुआवजे की स्वीकृति नहीं मिलती है। उन्होंने सुविधा शुल्क की बात से इंकार किया। कहा किसी भी तरह मुआवजा लेने के फेर में इस तरह के आरोप लगाये जाते हैं।

रिपोर्ट – गौरी शंकर प्रसाद

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

0Shares
0