कुदाल और हल के साथ सड़क पर उतर पप्पू यादव ने जताया विरोध

किसानों के अधिकारों को छिना जा रहा है: पप्पू यादव

किसान अपने जीवन को बचाने के लिए आज अपना खेत छोड़ सड़क पर उतरा है: पप्पू यादव

पटना : तीन कृषि कानूनों के विरोध में बुलाए गए भारत बंद के समर्थन में जन अधिकार पार्टी (लो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव सड़क पर उतरे. पप्पू यादव ने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ इनकम टैक्स चौराहा से डाकबंगला चौराहा तक मार्च किया और कुदाल और हल के साथ सड़क पर उतर अपना विरोध जताया.

जाप अध्यक्ष ने कहा कि किसानों और मजदूरों के अधिकारों को छिना जा रहा है. किसान अपने जीवन को बचाने के लिए आज अपना खेत छोड़ सड़क पर उतरा है. केंद्र सरकार की नजर किसानों की जमीन पर है. सरकार सस्ते दाम पर किसानों की जमीन को पूंजीपतियों को देना चाहती है.

पप्पू यादव ने कहा कि भाजपा के सहयोगी दल भी आज उसका साथ छोड़ रहे हैं. कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल अलग हो गई. प्रकाश सिंह बादल ने अपना पद्म विभूषण लौटा दिया. पंजाब और हरियाणा के खिलाड़ी भी अपना पुरस्कार लौटा रहे हैं.

आगे उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पिछले 6 वर्षों से जनता को सिर्फ परेशान कर रही है. पहले जीएसटी, नोटबंदी, बिना तैयारी के लॉकडाउन से आम लोगों को परेशानी हुई और अब इन कृषि कानून से देश के अन्नदाताओं को परेशान किया जा रहा है. इससे उनके जीवन पर खतरा आ गया है. हम हर परिस्थिति में किसानों के साथ खड़े हैं.

विरोध – प्रदर्शन के दौरान जाप नेताओं ने किसान विरोधी कानून रद्द करो, किसान एकता जिंदाबाद जैसे नारे लगाए.

बिहार में भी मंडी सिस्टम लागू करने की मांग करते हुए पप्पू यादव ने कहा कि बिहार में 2006 में ही मंडी को खत्म कर दिया गया था. आज किसान परेशान है, उसे उसकी फसल का सही दाम नहीं मिल रहा है. एमएसपी पर फसलों की ख़रीदारी नहीं हो रही है. किसान चाहता है कि मंडी सिस्टम लागू हो.

भाजपा पर हमला बोलते हुए पप्पू यादव ने कहा कि बीजेपी के नेता विरोध करने वाले किसानों को खालिस्तानी, मुसलमानों को पाकिस्तानी, मजदूरों और छात्रों को उग्रवादी कहते हैं. उन्हें किसान, छात्र, मजदूर, गरीब और कमजोर वर्ग से कोई लेना-देना नहीं है.

इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष राधवेंद्र सिंह कुशवाहा, प्रेमचंद सिंह, हरे राम महतो, राजेश रंजन पप्पू, राजू दानवीर, अवधेश लालू सहित पार्टी के अन्य एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहें.

रिपोर्ट – स्वेता मेहता

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