वर्ष भर कर सकते हैं मशरुम का उत्पादन

  • फसल अवशेष मशरुम उत्पादन का बेहतर संसाधन
  • स्वादिष्ट होते हैं पैडी मशरुम

नालन्दा (बिहार)हरनौत– कृषि विज्ञान केंद्र में मशरुम उत्पादन व उसके लाभ विषय पर आज ट्रेनिंग का दूसरा दिन था। विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ ज्योति सिन्हा ने बताया कि मशरुम के विभिन्न प्रभेदों का अलग-अलग तापक्रम पर उत्पादन किया जाता है। इस तरह से इच्छुक किसान वर्ष भर मशरुम की खेती कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सबसे कम तापमान में बटन मशरुम की खेती संभव है। इसके लिए 14 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान होना चाहिए। उस लिहाज से नवंबर, दिसंबर और जनवरी बटन मशरुम की खेती के उपयुक्त महीने हैं।
ऑयस्टर (ढींगरी) मशरुम के लिए 18 से 28 डिग्री तापमान बेहतर होता है। इस वजह से इसकी खेती के लिए अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फरवरी और मार्च तक का महीना बेहतर होता है।
जबकि, मिल्की(दूधिया) मशरुम के लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस का तापमान सही है। इस वजह से इसे अप्रैल, मई और जुन में उपजाया जा सकता है।
इसी तरह पैडी(पुआल) मशरुम के लिए 28 से 38 डिग्री सेल्सियस का तापमान सही होता है। इसका उत्पादन जुन, जुलाई, अगस्त और सितंबर महीने में भी किया जा सकता है।
मशरुम उत्पादन के लिए डॉ सिन्हा ने फसल अवशेष को सबसे बेहतर संसाधन बताया। कहा कि फसल अवशेष जलायें नहीं। बल्कि, संसाधन के रूप में उसका इस्तेमाल करें।
उन्होंने बताया कि पहले भूसे का उपचार कर लें। इससे उसमें मौजूद टॉक्सिन खत्म हो जायेंगे। भूसा गीला होना चाहिए। पर, इतना ही गीला हो कि उसे निचाेड़ने पर पानी नहीं निकले। इसके बाद उसमें लेयर के अनुसार या मिलाकर एक किग्रा भूसा में दो से ढाई सौ ग्रामीण मशरुम का बीज एक पॉलीथीन में पैक कर दें। एक महीना में मशरुम का उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
इसी तरह पैडी मशरुम को पुआल में उपजाया जा सकता है। इसका उत्पादन बंगाल व उड़ीसा में सबसे ज्यादा होता है। इसमें पुआल की आंट में बीज डालकर इसकी खेती कर सकते हैं। इसके लिए घर या बगीचे में जमीन से दो से तीन फीट ऊंची जगह बनाकर इसका उत्पादन कर सकते हैं। पैडी मशरुम से बने व्यंजन को सबसे स्वादिष्ट माना जाता है।

रिपोर्ट – गौरी शंकर प्रसाद

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