बिहार नेतृत्व संकट की राजनीतिक त्रासदी से गुजर रहा है : पुष्पम प्रिया चौधरी

नकली नेताओं ने बिहार को किया बर्बाद

पटना । प्लुरल्स पार्टी की प्रेसिडेंट पुष्पम प्रिया चौधरी ने कहा कि बिहार में नेतृत्व संकट अपने त्रासदी की चरम अवस्था में पहुंच गई है. उन्होंने राज्य के वर्तमान नेताओं को नकली और अक्षम मानते हुए लिखा कि नेता के तीन गुण होते हैं. वर्तमान परिदृश्य में यह तीनों गुण किसी नेतृत्व में नहीं दिखता है. उन्होंने ट्वीट करते हुए यह लिखा कि “नेता कौन? तीन गुण: तीसरा – पॉलिसी की विशिष्ट पढ़ाई, दूसरा – चुनौती देने का अदम्य साहस, और पहला – लोगों के प्रति नैतिक प्रतिबद्धता. विचारधारा अलग हों, एक-दूसरे के कठोर आलोचक हों, लेकिन अगर इन तीन में से एक भी गुण कम पड़ा तो भविष्यवाणी पहले दिन की जा सकती है – नेता नक़ली है, वादे धोखा हैं और नेतृत्व असफल होगा. इस निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए 15-15 साल देने की ज़रूरत नहीं”.


अपने ट्वीट के साथ छ राष्ट्रीय नेताओं की तस्वीर लगाई है जिसमें उनकी वैचारिक आस्था औऱ अध्ययन का विवरण है. इसमें महात्मा गांधी को सत्याग्रही, सुभाष चंद्र बोस को क्रांतिकारी, जवाहरलाल नेहरू को आधुनिकतावादी, भीमराव अंबेडकर को संविधानवादी, राममनोहर लोहिया को सुधारवादी औऱ जयप्रकाश नारायण को संपूर्ण क्रांति वादी बताया गया है.
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म की 2017 के रिपोर्ट के अनुसार बिहार सरकार के मंत्रिमंडल में मात्र एक सदस्य थे जिन्होंने पीएचडी की उपाधि धारण की थी. मंत्रिमंडल में 1 सदस्य न्यूनतम साक्षर की श्रेणी में थे, 1 मंत्री आठवीं पास, 3 मंत्री दसवीं पास, 5 मंत्री 12वीं पास, 13 स्नातक और 4 मंत्री परास्नातक थे. ADR की रिपोर्ट बताती है कि आजादी के समय के नेता और वर्तमान के समय के नेता की क्षमताओं में कितना अंतर है.

जर्मन के दार्शनिक नीत्शे का मानना था कि आप महान नेता नहीं बन सकते यदि जनता के साथ सहानुभूति और मजबूत आत्मचेतना नहीं है. इसी आत्मचेतना से वह जनमानस से जुड़ते है. महान नेता का पैमाना हमदर्दी भी होता है पर आज के समय में सत्ता का जनता से हमदर्दी का नाता टूट सा गया है.जब आप सत्ता से स्वास्थ्य- रोजगार- विकास औऱ सरोकार का सवाल खड़ा करेंगे तो कहेंगे की विपक्ष ने पंद्रह सालों में क्या किया? जब आप विपक्ष से पूछेंगे तो कहेंगे की पंद्रह सालों में सत्ता पक्ष ने क्या किया? इन सबों में नेताओं ने निर्लज्जता को भी पीछे छोड़ दिया है, ऐसा लगता है मानो वह जनता के प्रति उत्तरदायी न होकर केवल दलों को दोषारोपण देकर बचना चाहते हैं. पक्ष और विपक्ष की इस नकली लड़ाई में जनता के प्रति कौन उत्तरदायी होगा? आखिर जयप्रकाश नारायण के नकली समाजवादी चेलों के शासनकाल में जनता के हालात क्यों नहीं सुधरें? एक दूसरे पर दोषारोपण देकर आखिर कब तक सरकार बचती रहेगी? इन नेताओं ने जनता के साथ-साथ जयप्रकाश नारायण को भी धोखा दिया है.

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