बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के तीसरे चरण में तीसरी शक्ति का भी इम्तिहान

बिहार विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान शनिवार को संपन्न हो गया। इस चरण के चुनाव में राजग और महागठबंधन के साथ ही तीसरी शक्तियों का भी इम्तिहान है। मिथिलांचल से लेकर कोसी और सीमांचल तक कई दलों में तीसरी ताकत बनने की होड़ लगी थी। इनमें एआईएमआईएम के ओवैशी, जाप के पप्पू यादव, रालोसपा के उपेंद्र कुशवाहा के नाम प्रमुख हैं। इन दलों को मिलने वाले वोटों पर सबकी निगाहें लगी हैं। यही वोट दोनों प्रमुख गठबंधनों खासकर महागठबंधन का गणित बना-बिगाड़ सकते हैं।

तीसरे चरण में जिन इलाकों में चुनाव हुआ है, उनमें सीमांचल के जिलों में मुस्लिम मतदाता बहुतायत में हैं। कई जगह तो इतने हैं कि हार-जीत के फैसले के
लिए उन्हें किसी दूसरे की जरूरत नहीं है। इन्हीं वोटों पर ओवैशी ने नजरें गड़ा रखी थीं। मुस्लिम वोटरों में ओवैशी जितनी भी सेंधमारी करेंगे, उतना ही ज्यादा नुकसान महागठबंधन का होगा। यूं तो मिथिलांचल और कोसी अंचल की कुछ सीटों पर भी मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी है लेकिन ओवैशी का असर सीमांचल की कुछ सीटों पर ही रहने की उम्मीद है। ओवैशी ने 24 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे।

वहीं,जाप ने भी कोसी से लेकर सीमांचल तक प्रत्याशी उतारे हैं। इनमें कई राजद सहित दूसरे दलों के बागी भी हैं। खुद जाप अध्यक्ष सह पूर्व सांसद पप्पू यादव मधेपुरा सीट से चुनाव मैदान में उतरे। मधेपुरा के यादव मतदाता अलग मिजाज के माने जाते रहे हैं। ऐसे में पप्पू यादव इस पूरे इलाके में कितने प्रभावी रहे, इसका पता 10 नवंबर को चलेगा। हालांकि जानकारों का यह भी कहना है कि उनको मिलने वाले वोट यदि महागठबंधन के प्रत्याशियों को प्रभावित करेंगे तो कई जगह इसका प्रभाव एनडीए प्रत्याशियों पर भी पड़ेगा।

तीसरे चरण में रालोसपा के भी 24 प्रत्याशी मैदान में थे। उपेंद्र कुशवाहा ने दूसरे और तीसरे चरण में काफी संख्या में कुशावाहा प्रत्याशी उतारकर रालोसपा ने महागठबंधन और एनडीए के वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश की है। यह कोशिश कितनी परवान चढ़ी, इसका भी इम्तिहान होना है।

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