पौधारोपण का बेहतर समय, करें बागवानी होगा फायदा

हरनौत- वर्ष के फरवरी और जुलाई माह पौधारोपण के लिये उपयुक्त हैं। हालांकि, मानसूनी महीने के कारण जुलाई ज्यादा बेहतर है। कृषि विज्ञान केंद्र की बागवानी विशेषञ डॉ विभा रानी ने कहा कि जुलाई महीने में बारिश का मौसम होने से मिट्टी में नमी रहती है। मिट्टी हल्की होती है। इस वजह से पौघे की जड़ों की बढ़वार अच्छी होने से पौधे को लगने में आसानी होती है। जबकि, फरवरी में नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है। वैज्ञानिक डॉ विभा ने बताया कि पौधा लगने के बाद लगातार उसकी देखरेख करें। मिट्टी की सतह के उपर जहां पौधे में ज्वाइंट होता है, उसके नीचे अगर तने निकलें तो उन्हें हटा देना चाहिये। इससे पौधे की सीधी बढ़वार अच्छी होती है।

कृषि वानिकी के लिये होड़, पौधे की बिक्री बढ़ी

वन विभाग की स्थानीय पौधशाला में फलदार व इमारती लकड़ी के पौधों को खरीदारों की कतार लगातार बढ़ रही है।
पौधशाला की संरक्षक अवर निरीक्षक श्वेता प्रियदर्शिनी बताती हैं कि आठ दिनों में आठ हजार से ज्यादा पौधों की खरीद की जा चुकी है। इसमें सबसे अधिक पौधे कृषि वानिकी के अंतर्गत खरीदे गये हैं। मनरेगा के सहयोग से चलने वाले कृषि वानिकी कार्यक्रम से इच्छुक लोग अपनी निजी जमीन पर कम से कम दो सौ पौधे लगवा सकते हैं। इससे उन्हें भी वनपोषक के रुप में दी जाने वाली सुविधा पांच वर्ष तक मिलेगी। हालांकि, सार्वजनिक स्थानों अलंग, संपर्क पथ के अगल-बगल लगने वाले सौ पौधों पर एक वनपोषक को रखने का प्रावधान है। मनरेगा के कनीय अभियंता लाल बहादूर शास्त्री ने बताया कि निजी जमीन पर भी कृषि वानिकी से पौधे लगाने पर पौधों की सुरक्षा के लिये गैबियन अथवा बाड़ लगाने को अनुदान की राशि मिलती है। इसके अलावा पटवन को जलस्त्रोत की व्यवस्था का भी प्रावधान है। इसके अलावा पौधों की देखरेख के लिये पांच वर्ष तक हर माह पंद्रह सौ रुपये भी दिये जाते हैं। हालांकि शर्त है कि सभी पौधे सुरक्षित होने चाहिये।
वन पदाधिकारी श्वेता प्रियदर्शिनी ने बताया कि वर्तमान में प्रति पौधे दस रुपये की दर से दिये जा रहे हैं। यदि तीन वर्षों तक पौधे का रखरखाव सही रहा। तब वह पेड़ का रुप लेगा। इसके बाद किसान को पेड़ की कीमत मिलेगी ही। साथ में साठ रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी। अर्थात अगर किसी ने सौ पौधे खरीदे। तीन वर्षों तक पौधा जीवित रहा तो वह पेड़ का रुप ले लेगा। इसका सत्यापन होने पर तीन वर्ष की अवधि के बाद किसान को सात हजार रुपये मिलेंगे। इसके अलावा पेड़ पर किसान का अपना स्वामित्व होगा।

खेतों की मेड़ पर लगायें पौधे, होगा फायदा

मनरेगा के पीओ शिवनारायण लाल बताते हैं कि फसली खेत की मेड़ पर पौधे लगाने के बहुत फायदे हैं।
अक्सर लंबे-पत्तेदार फसलों पर कीट-पतंगों का प्रकोप देखा जाता है। ये कीट-पतंगे अपने ठहराव व प्रजनन के लिए ऊंची जगह खोजते हैं। साथ ही उससे भोजन भी प्राप्त करते हैं। इससे पत्ते खराब हो जाते हैं, जिससे पौधे की बढ़वार पर असर पड़ता है। खेतों की मेड़ पर पेड़-पौधे होने से -पतंगों का असर फसल पर कमेगा।

रिपोर्ट – गौरी शंकर प्रसाद

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

0Shares
0