बिहार के राजनीति पटल पर ऐतिहासिक दुस्साहस करने वाली : पुष्पम प्रिया चौधरी

पटना : 8 मार्च 2020 को पटना के राजनीतिक गलियारों में एक हलचल सी थी. इसी दिन पुष्पम प्रिया चौधरी ने एक नई राजनीतिक पार्टी के जन्म की घोषणा की थी. यह एक ऐतिहासिक दुस्साहस था, जिस घोषणा ने सत्ता के मठाधीशों को चुनौती दी थी, पाटलिपुत्र का सिंहासन परेशान था. ‘बिहार से प्रेम और राजनीति से नफ़रत’ के साथ प्लुरल्स पार्टी के आने की घोषणा करके पुष्पम प्रिया चौधरी ने सत्ता में बैठे मठाधीशों को हैरान कर दिया.
सुश्री चौधरी ने बिहार के भावी मुख्यमंत्री के तौर पर अपने नागरिकों को एक पत्र लिखा था जिसमें बदलाव की बात थी. पर सवाल यह था कि आख़िर पुष्पम प्रिया चौधरी हैं कौन? किसने किया यह ऐतिहासिक दुस्साहस?

कौन है पुष्पम प्रिया चौधरी : पुष्पम प्रिया चौधरी प्लुरल्स की प्रेसिडेंट हैं. उन्होंने प्लुरल्स के माध्यम से 2020 में एक राजनीतिक आंदोलन “सबका शासन” की शुरुआत की है. यह ‘प्लुरल’ का राजनीतिक दर्शन ही है जो उनको, उनकी विचारधारा को और साथ ही उनके आंदोलन को परिभाषित करता है. प्लुरल्स वर्तमान राजनीतिक व्यवहार के विरूद्ध खड़ा होकर बिहार की राजनीति को पुन: परिभाषित कर रहा है. वे मज़बूती से यक़ीन करती हैं कि यह देश जिन सिद्धांतों और मज़बूत नैतिकता के धरातल पर जन्मा था, उन बुनियादी तत्त्वों को फिर से स्थापित करने की आवश्यकता है. “राजनीति को बदलना होगा क्योंकि लोगों का भविष्य और उनकी भलाई इस पर अब पहले से भी ज़्यादा आश्रित है. हम पीछे छूट जाने का जोखिम नहीं ले सकते. किसी को तो आगे आना होगा. मैं वह ‘किसी’ बनने जा रही हूँ।” वे राजनीति को पॉज़िटिव, प्रॉडक्टिव और पॉलिसी निर्माण पर केंद्रित करना चाहती हैं – “मैं सिर्फ़ कार्यक्रम-आधारित राजनीति का समर्थन करती हूँ.”

शिक्षा-दीक्षा : पुष्पम प्रिया चौधरी का लालन-पालन दरभंगा, बिहार में हुआ. वे अपनी उच्च शिक्षा के लिए बिहार से बाहर गईं.बाद में वे यूनाइटेड किंगडम गईं और यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स के इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज़ से डेवलपमेंट स्टडीज़ में स्नातकोत्तर की डिग्री ली. इस पढ़ाई में उनके विषय रहे गवर्नन्स, डेमोक्रेसी और डेवलपमेंट  ईकोनोमिक्स उन्होंने समस्त विश्व की प्रभावशाली नीतियों के साथ-साथ बिहार और भारत की असफल नीतियों पर शोध किया. उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव 2015 की पृष्ठभूमि में वोटिंग पैटर्न और वोटिंग व्यवहार पर भी फ़ील्ड में एक मौलिक शोध किया और “पार्टी-कैंडिडेट-वोटर लिंक़ेज तंत्र आधारित उत्तरदायित्व व सुनवाई” पर अपनी थीसिस लिखी जिसे तुलनात्मक चुनाव अध्ययन के मानद विशेषज्ञों द्वारा काफ़ी सराहा गया.

सुश्री चौधरी ने इसके बाद लंदन स्कूल ऑफ ईकोनोमिक्स एंड पोलिटिकल सायन्स से मास्टर ऑफ पब्लिक एड्मिनिस्ट्रेशन की दूसरी स्नातकोत्तर डिग्री ली.एलएसई में उन्होंने राजनीति विज्ञान, राजनीतिक दर्शन, लोक प्रशासन, अर्थशास्त्र, पब्लिक पॉलिसी का दर्शन, सोशल पॉलिसी और पोलिटिकल कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की. यहाँ पढ़ते हुए उन्हें पेरिस के प्रतिष्ठित सियाँस पो में भी राजनीति विज्ञान की दोहरी डिग्री लेने का मौक़ा दिया गया लेकिन उन्होंने एलएसई में रहना पसंद किया – “एलएसई की पढ़ाई और रीसर्च सर्वश्रेष्ठ है, मैं यहाँ एक दिन भी खोना नहीं चाहती थी, एक साल तो बहुत दूर की बात थी.”
प्रश्न उठता है की पुष्पम प्रिया चौधरी ने बिहार का चयन क्यूँ किया, वह बताती हैं कि “मैं बिहार से बाहर ज़रूर थी लेकिन बिहार ने मुझे कभी नहीं छोड़ा. यह सच है कि बाहर पैसे और अवसर बहुत हैं, लेकिन पैसा मेरे लिए कभी जीवन की प्रेरणा नहीं रहा. मुझे लंदन पसंद है क्योंकि लोग एक-दूसरे का आदर करते हैं. लोग सरकार के लिए महत्वपूर्ण हैं, इससे मतलब नहीं कि वे कौन हैं और कहाँ से आते हैं. जीवन बहुत आसान है और पब्लिक सर्विस प्रभावी. मैं मरने से पहले बिहार को अपने जीवन-काल में वैसा ही देखना चाहती हूँ, इसलिए मैंने अपना सामान बांधा और अपनी मातृभूमि वापस आ गयी.”
उनका मानना है कि मुझे बिहार को बदलना है, यह एक ऐतिहासिक दुस्साहस है जिसकी शुरुआत सुश्री चौधरी ने कर दी है.

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