खादी ग्रामोद्योग नरहन के जर्जर भवन से उत्पन्न हो रही रोजगार की संकट

खादी ग्रामोद्योग नरहन के जर्जर भवन से उत्पन्न हो रही रोजगार की संकट

संवाददाता : पलटन साहनी

समस्तीपुर । खादी ग्रामोद्योग नरहन भवन की जर्जर स्थिति के कारण खत्म होने के कगार पर आ गई है। 65 वर्ष पूर्व बने इस भवन की कहानी इसकी जर्जर हालत बताती है। ग्रामोद्योग में 20 महिलाओं के द्वारा चरखों के द्वारा सुत कटाई का काम होता है। जो कि बुनने के लिए फिर भागलपुर भेज दिया जाता है। खादी ग्रामोद्योग आयोग संसद के “खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम 1956” के तहत भारत सरकार द्वारा निर्मित एक वैधानिक निकाय है। यह भारत में खादी और ग्रामोद्योग से संबंधित सूक्ष्म,लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय (भारत सरकार) के अन्दर आने वाली एक शीर्ष संस्था है। जिसका मुख्य उद्देश्य है – “ग्रामीण इलाकों में खादी एवं ग्रामोद्योगों की स्थापना और विकास करने के लिए योजना बनाना,प्रचार करना,सुविधाएं और सहायता प्रदान करना है। वही इस खादी भंडार के मैनेजर अरविंद कुमार बताते हैं कि” अधिकारी तो आते हैं पर सिर्फ देख कर चले जाते हैं। इस ग्रामोद्योग से 20 महिलाओं के परिवार का भरण- पोषण उनकी सुत कटाई की क्षमता से चलता है। मैं पिछले 30 सालों से यहां कार्यरत हूँ और अब बस 2 साल की और नौकरी बची। मैंने इन 30 सालों में कई बार अधिकारियों से भवन की स्थिति ठीक करवाने की गुहार लगाई लेकिन अभी तक स्थिति जस की तस है”


स्थानीय निवासियों ने भी भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए काम कर रही महिलाओं के रोजगार पर खतरा बताया। स्थानीय निवासी संजीव कुमार मिश्रा ने बताया कि” बापू ने कहा था कि खादी स्वतंत्रता की पोशाक है पर आज इस भवन की जर्जर स्थिति कुछ और ही बयां करती है। खादी बहुत ही लाभकारी गुणों से भरी है और हमें और आपको इस ग्रामोद्योग को बचाने के लिए आगे आना ही होगा।

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